भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने कोबरापोस्ट द्वारा किए गए मनी लांड्रिंग के खुलासे के मामले में अपनी जांच पूरी कर ली है और अगर नियमों के उल्लंघन के मामले में कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
आरबीआई के केंद्रीय बोर्ड की बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में गवर्नर डी. सुब्बाराव ने बताया कि जांच पूरी कर ली गई है और उसकी आंतरिक रिपोर्ट भी तैयार है। अब निर्धारित प्रक्रिया के तहत जांच को उसके अंजाम तक पहुंचाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि इस मामले में सबसे पहले व्यक्तिगत स्तर पर उन कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई होगी, जो इस तरह की गड़बड़ी में शामिल हुए और जिन्होंने बैंकिंग के नियमों का उल्लंघन किया।
उन्होंने कहा कि इस मामले में व्यवस्थागत कदम पहले ही उठाए जा चुके हैं, जिनमें से कुछ का जिक्र बीते सप्ताह जारी की गई मौद्रिक व ऋण नीति की समीक्षा में भी किया गया था।
मनी लांड्रिंग में संलिप्त पाए गए बैंकों पर पेनाल्टी लगाने या अन्य कार्रवाई करने के सवाल पर राव ने कहा कि इन चीजों के निर्धारण लिए हमें एक निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा।
दोषी बैंकों पर कार्रवाई की कोई स्पष्ट समय सीमा न बताते हुए उन्होंने कहा कि कई तरह की प्रक्रियाएं इससे जुड़ी हुई हैं, ऐसे में र्कारवाई के लिए कोई तयशुदा समय सीमा बता पाना संभव नहीं है। जहां तक व्यवस्था या ढांचे के स्तर पर कार्रवाई करने की बात है, तो हालिया मौद्रिक समीक्षा में इस बारे में जानकारी दी गई है।
गौरतलब है कि मनी लांड्रिंग मामले में वित्त मंत्रालय द्वारा सरकारी बैंकों और भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) को कार्रवाई करने को कहे जाने के बाद इन बैंकों व एलआईसी ने 31 कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की है, जिनमें से 15 को निलंबित भी किया गया है।
इससे पहले मामले से जुड़े निजी बैंक भी कर्मचारियों पर कार्रवाई कर चुके हैं।
मौजूदा कानूनों के अनुरूप नहीं इस्लामिक बैंकिंग
रिजर्व बैंक ने स्पष्ट किया है कि इस्लामिक बैंकिंग देश के मौजूदा बैंकिंग कानूनों के अनुरूप नहीं है।
सुब्बाराव ने कहा कि इस्लामिक बैंकिंग में न तो ब्याज लिया जाता है और न ही दिया जाता है। ऐसे में यह देश की मौजूदा बैंकिंग प्रणाली के अनुरूप नहीं है।
सुब्बाराव ने कहा कि देश में बैंकिंग प्रणाली के संचालन के लिए ब्याज चार्ज करना अनिवार्य है और क्योंकि बैंक जमा पर ब्याज देता है और उसके पास होने वाली अतिरिक्त नकदी राशि आरबीआई में जमा करवानी होती है, जिस पर बैंकों को ब्याज भी मिलता है।
हमारा निष्कर्ष यह है कि इस्लामिक बैंकिंग को इजाजत दी जाए या नहीं, इस पर फैसला सरकार ही ले सकती है। यदि ऐसी इजाजत दी जाती है, तो इसके लिए इस्लामिक बैंकिंग के अनुरूप एक कानून बनाना होगा।
उन्होंने कहा कि वे सिर्फ बैंक कानून के तहत क्रेडिट जोखिम लेने की अनुमति दे सकते हैं। इसे शरिया विनियमन के तहत आना होगा।