रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने ग्राहक को जानो (केवाईसी) नियमों के तहत मान्य कागजातों के दायरे का विस्तार करते हुए ई-आधार और ई-केवाईसी को भी इसमें शामिल कर लिया है। वहीं, दूसरी तरफ इस दायरे को सख्ती से लागू करते हुए अधिसूचित कागजातों के अलावा किसी अन्य कागजात को मान्यता देने का बैंकों का अधिकार समाप्त कर दिया है।
आरबीआई ने सोमवार को एक अधिसूचना जारी कर कहा कि अब ई-आधार और ई-केवाईसी भी प्रिवेंशन ऑफ मनी लांड्रिंग कानून के तहत ‘आधिकारिक तौर पर मान्य कागजात’ में शामिल होंगे। इसका सीधा मतलब यह है कि यदि आपको अपना आधार नंबर याद है, तो आप बिना किसी कागजात के बैंक में जाकर अपना आधार नंबर बताइए और वहां अपना खाता खुलवा लीजिए। यदि आप उसी पते पर रह रहे हैं जो आपके ई-आधार में लिखा है तो यही आपके पते का प्रमाणपत्र भी होगा।
इस सुविधा के तहत खाताधारक या खाता खुलवाने के इच्छुक व्यक्ति को यूनीक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी (यूआईडीएआई) को यह अधिकार देना होगा कि वह उसकी पहचान, फोटो और अन्य जानकारी बैंक के साथ साझा कर सके। इसके बाद यूआईडीएआई संबंधित व्यक्ति की जानकारी अधिकृत बैंक को भेज देगा, जिसके आधार पर केवाईसी की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।
इसके अलावा, यूआईडीएआई द्वारा शुरू की गई ई-केवाईसी सुविधा के तहत प्राधिकृत बैंक नाम, बॉयोमिट्रिक आंकड़े आदि का संग्रह कर यूआईडीएआई पर उपलब्ध आंकड़े के साथ उनका मेल कर केवाईसी प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। इसके साथ ही मनी लांड्रिंग पर लगाम लगाने के लिए केवाईसी के कागजातों के दायरे को और सख्त करते हुए आरबीआई ने कहा है कि अब इसके लिए सिर्फ प्रिवेंशन ऑफ मनी लांड्रिंग कानून में उल्लिखित या केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित कागजात ही मान्य होंगे।
पहले ‘आधिकारिक रूप से मान्य कागजातों’ में सूचीबद्ध कागजातों के अलावा बैंकों को अपनी तरफ से भी मान्य कागजात तय करने का अधिकार था। केंद्रीय बैंक ने बैंकों को दिया गया यह अधिकार समाप्त कर दिया है। आरबीआई ने कहा है कि अब आधिकारिक रूप से मान्य कागजातों में सिर्फ पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, मनरेगा का जॉब कार्ड, आधार कार्ड या आरबीआई की सलाह से केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित कोई कागजात शामिल हैं।