देश की विकास दर पिछले नौ साल के न्यूनतम स्तर पर है और औद्योगिक उत्पादन में वृद्धि लगभग नगण्य है। इसके बावजूद देश की अर्थव्यवस्था का बारीकी से अध्ययन करने वाली संस्था सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनामी (सीएमआईई) को चालू वित्त वर्ष में जीडीपी में 7.3 फीसदी वृद्धि की उम्मीद है। संस्था की ओर जारी ताजा रिपोर्ट में यह बात कही गई है।
सीएमआईई मानती है कि आपूर्ति की अड़चनें दूर होंगी, जिसकी वजह से 2011-12 में जीडीपी पर गहरा असर पड़ा था। 2011-12 की अंतिम तिमाही में जीडीपी 5.3 फीसदी और वर्ष के दौरान 6.5 फीसदी रहने का अनुमान है। 2008 के दौरान विश्व जब बुरी तरह संकट में फंसा था, उस समय भी भारतीय अर्थव्यवस्था ने 6.7 फीसदी की वृद्धि दर हासिल की थी।
संस्था मानती है कि कोयला, गैस और कच्चे तेल की आपूर्ति में सुधार से मैन्यूफैक्चरिंग और बिजली क्षेत्र को गति देने में मदद मिलेगी। मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर में 2012-13 के दौरान पांच प्रतिशत वृद्धि का अनुमान है।