भारत के वर्करों की आमदनी विकसित देशों के वर्करों की तुलना में काफी खराब है। एक जैसी परिस्थितियों और तकनीक में काम करने वाले भारतीय वर्करों को विकसित देशों के वर्करों की तुलना में मात्र 10 फीसदी ही मेहनताना मिलता है। इसका खुलासा एक अध्ययन में हुआ है।
प्रिंसटन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर आर्ले अशेनफेल्टर के रिसर्च पेपर में मैकडोनाल्ड रेस्टोरेंट के वर्करों के मेहनताने का उल्लेख किया गया है। रिसर्च पेपर में कहा गया है कि भारत में मैकडोनाल्ड के एक वर्कर को मात्र 0.45 अमेरिकी डॉलर प्रति घंटे के हिसाब से मिलता है जबकि ऐसी काम की परिस्थितियों में काम करने वाला अमेरिकी वर्कर उनसे करीब 16 गुना अधिक मेहनताना पाता है।
रिसर्च पेपर में 60 से अधिक देशों में मैकडोनाल्ड में कार्यरत वर्करों के मेहनताने का अध्ययन किया गया है। सर्वे में यह भी कहा गया है कि अमेरिका में मैकडोनाल्ड में कार्यरत एक कर्मी करीब 7.33 डॉलर प्रति घंटे कमाता है और इस मेहनताने के साथ वर्कर 3.04 अमेरिकी डॉलर की कीमत वाले दो से अधिक बिग मैक को वहन कर सकता है।
वहीं दूसरी ओर भारत का एक मैकडोनाल्ड का वर्कर मात्र 0.46 डॉलर प्रति घंटे कमाता है जबकि अमेरिका जैसा ही एक बिग मैक भारत में करीब 1.29 डॉलर की कीमत में बेचा जाता है। इसलिए यहां के वर्करों को एक बिग मैक खरीदने के लिए दो से तीन घंटे काम करने की जरूरत होती है। सर्वे में कहा गया है कि भारत, चीन, लैटिन अमेरिका और मध्य पूर्व के देशों में कार्यरत वर्करों को विकसित देशों जैसे अमेरिका, कनाडा, जापान और पश्चिमी यूरोप के देशों के वर्करों की तुलना में कम मेहनताना मिलता है।