देश में हर तीन माताओं में से एक मां अपने परिवार को दे रही खाने की गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर अनिश्चित है। रिसर्च पैसिफिक द्वारा हाल में किए गए मल्टी सिटी सर्वे में यह बात सामने आई है।
टेट्रा पैक द्वारा कराए गए द ‘कन्वर्सेशंस विथ मदर्स’ फूड सेफ्टी सर्वे में यह भी खुलासा हुआ है कि ज्यादातर माताएं उपभोग किए जाने वाले खाने की ताजगी व शुद्धता और मिलावट के खतरे को लेकर चिंतित थीं। सर्वे के निष्कर्ष को वर्ल्ड फूड डे के मौके पर जारी किया गया है।
इस सर्वे से टेट्रा पैक को एक जागरूकता कार्यक्रम राइट टू कीप फूड सेफ शुरू करने की प्रेरणा भी मिली है।
यह कार्यक्रम माताओं को खाद्य पदार्थों की सुरक्षा और पोषण को लेकर ज्ञान और तथ्यों से सशक्त बनाएगा और माताओं को इस जानकारी को दूसरी माताओं तक पहुंचाने के लिए प्रेरित करेगा।
इसका एक अभिन्न हिस्सा पोषण अनुपात है। खाद्य सुरक्षा, पोषण और पैकेजिंग पर यह अपनी तरह का पहला आनलाइन कोर्स है। यह कोर्स इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, द आल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, द इंडियन डायटेटिक्स एसोसिएशन, नेशनल डेयरी रिसर्च इंस्टीट्यूट और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूट्र्रिशन के विशेषज्ञों ने तैयार किया है।
लांच के मौके पर उपस्थित डॉक्टर, अभिनेत्री और दो बच्चों की मां अदिति गोवित्रिकर ने कहा कि मिलावट, दूषित होने और खाने को सुरक्षित रखने के तरीके के बारे में जागरूकता का अभाव होने के कारण खाने से होने वाली बीमारियां फैलने के कारण खाद्य सुरक्षा एक चिंता बनी हुई है।
हमें सर्वे से एक चौंकाने वाली जानकारी मिली है कि 70 फीसदी से अधिक माताएं गंभीर बीमारियों जैसे पीलिया, कॉलरा और टायफाइड को खाद्य सुरक्षा से नहीं जोड़ती है। उन्होंने कहा कि मुझे राइट टू कीप फूड सेफ अवेयरनेस कैंपेन को समर्थन देकर खुशी हो रही है।
मैं सभी माताओं को पोषण अनुपात का कोर्स करने के लिए प्रोत्साहित करती हूं। टेट्रा पैक साउथ एशिया मार्केट्स मार्केटिंग डायरेक्टर सुमित खट्टर ने कहा कि सर्वे से पता चलता है कि जहां माताएं उपभोग किए जाने वाले खाद्य और पेय को लेकर काफी चिंतित हैं, माताओं की बेहतर जानकारी तक पहुंच और सही विकल्प चुनने का अधिकार मिलने की जरूरत है।