अवकाश प्राप्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति एम बी शाह की अध्यक्षता वाले विशेष जांच दल (एसआईटी) ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि फ्रांस सरकार से मिली जानकारी के मुताबिक एचएसबीसी की जेनेवा शाखा में ६२८ भारतीयों के खाते की सूची में (दो को छोड़ कर क्योंकि इनके नाम दो बार आ गए हैं) से २८९ व्यक्तियों के खाते में एक भी पैसे नहीं हैं। शेष ३३९ खातों में कुछ न कुछ रकम शेष थी। हालांकि इस रिपोर्ट में किसी भी व्यक्ति का नाम उजागर नहीं किया गया है। एसआईटी रिपोर्ट के मुताबिक ६२८ व्यक्तियों में से २०१ व्यक्ति या तो भारत में नहीं रहते हैं या उन्हें ढूंढना मुश्किल (नॉन ट्रेसेबल) है। शेष ४२७ व्यक्तियों पर कार्रवाई संभव है।
रिपोट के मुताबिक इन मामलों में ४४७९ करोड़ रुपये की राशि का संबंध है। इनमें से आय कर विभाग ने ७९ इनटिटी के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। रिपोर्ट के मुताबिक आय कर विभाग ने अघोषित आमदनी में से २९२६ करोड़ रुपये की कर वसूली भी कर ली है। आय कर कानून १९६१ के तहत ४६ मामलों में जुर्माना लगाने की प्रक्रिया शुरू की गई है । अभी तक ३ मामलों में जुर्माना लगा दिया गया है जबकि अन्य मामलों में यह प्रक्रिया जारी है।
एसआईटी ने इस रिपोर्ट में काला धन पर अंकुश लगाने के लिए कई कदम सुझाए हैं जिनमें एक सीमा से ऊपर नकदी कारोबार पर अंकुश लगाने, एक लाख रुपये से ऊपर के भुगतान चाहे नकद किया जा रहा हो या चेक से, पैन नंबर अनिवार्य रूप से घोषित करने आदि शामिल हैं। यूरोपीय देशों में अपनाये जा रहे तरीके का उल्लेख करते हुए रिपोर्ट में बताया गया है कि नकदी किस सीमा तक इधर से उधर की जा सकती है, यह तय होना चाहिए। सरकार चाहे तो इसकी सीमा १० लाख रुपये तय कर सकती है या १५ लाख रुपये।
एसआईटी ने खनन कारोबार, पोंजी योजना, लौह अयस्क का निर्यात, आयात-निर्यात मार्गों का दुरूपयोग आदि कुछ कारोबारों को चिन्हित किया है जहां काला धन बनने की ज्यादा गुंजाइश रहती है। रिपोर्ट में बताया गया है कि गुजरात एवं महाराष्ट्र में नकदी को एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंचाने वाले अंगडिय़ा की भूमिका काला धन को इधर से उधर करने में भी हो सकती है।