भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने प्रमुख अर्निंग रेशियो का खुलासा न करने के मामले में रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) पर 13 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। सेबी ने इसे लिस्टिंग एग्रीमेंट का उल्लंघन माना है। यह आदेश सेबी द्वारा सात वर्ष पुराने मामले की जांच के बाद आया है। इस मामले में मुकेश अंबानी की अगुवाई वाली आरआईएल पर अपने प्रमोटर्स को 12 करोड़ वारंट जारी करने में अनियमितता का आरोप था।
रिलायंस को जारी हुआ था कारण बताओं नोटिस
आरोप था कि अप्रैल 2007 में वारंट जारी किए जाने से आरआईएल की प्री-इश्यू पेड अप इक्विटी शेयर कैपिटल डायल्यूट हुई, लेकिन कंपनी छह तिमाही तक प्रमुख अर्निंग रेशियों का खुलासा करने में असफल रही। बाजार नियामक ने अपने 15 पेज के आदेश में कहा है कि इसके बाद सेबी ने डाइल्यूटेड अर्निंग पर शेयर (डीइपीएस) का खुलासा स्टॉक एक्सचेंज को करने के लिए लिस्टिंग एग्रीमेंट और सेक्युरिटीज कांट्रैक्ट्स (रेगुलेशन) एक्ट के प्रासांगिक नियमों के कथित उल्लंघन के मामले में जांच शुरू की। इस मामले में आरआईएल को पिछले वर्ष फरवरी में कारण बताओ नोटिस जारी किया था।
45 दिन में जमा करना है जुर्माना
कंपनी के जवाब का अध्ययन करने और मामले की आगे जांच करने के बाद सेबी ने कहा कि अर्निंग पर शेयर निवेशकों के लिए यह फैसला करने में अहम कारक है कि निवेश जारी रखा जाए या किसी खास कंपनी के शेयरों में निवेश किया जाए।
इसके आधार पर सेबी ने लिस्टिंग एग्रीमेंट के उल्लंघन पर 1 करोड़ रुपये और एससीआरए के प्रावधानों के उल्लंघन पर 12 करोड़ रुपये जुर्माना लगाने का फैसला किया गया है। आरआईएल को डिमांड ड्राफ्ट के जरिए 12 करोड़ रुपये जुर्माने का भुगतान 45 दिन में सेबी को करने को कहा गया है।