अंबानी भाइयों ने देश में टेलीकॉम कारोबार के लिए हाथ मिलाते हुए 1,200 करोड़ रुपये का एक बड़ा करार किया है। इस समझौते के तहत मुकेश अंबानी अपने छोटे भाई अनिल अंबानी के ऑप्टिक फाइबर नेटवर्क का इस्तेमाल अपनी टेलीकॉम कंपनी शुरू करने के लिए कर सकेंगे।
समझौते के अंतर्गत, मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज की टेलीकॉम कंपनी 4जी सेवाओं की शुरुआत के लिए राष्ट्रीय स्तर पर रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम) के ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क का इस्तेमाल करेगी।
आरकॉम की ओर से जारी बयान के मुताबिक, रिलायंस जियो इंफोकॉम लिमिटेड और आरकॉम ने मंगलवार को करीब 1,200 करोड़ रुपये के एक प्रतिबद्ध करार किया है। यह राष्ट्रीय स्तर पर आरकॉम के विभिन्न शहरों से जुड़े ऑप्टिक फाइबर नेटवर्क के इस्तेमाल के लिए दिया जाने वाला शुल्क है।
अनुबंध की शर्तों के अंतर्गत रिलायंस जियो इंफोकॉम अपनी 4जी सेवाएं शुरू करने के लिए आरकॉम के 1,20,000 किलोमीटर के अंतर-शहरीय ऑप्टिक फाइबर नेटवर्क का इस्तेमाल करेगी। वहीं, भविष्य में रिलायंस जियो द्वारा बनाए जाने वाले ऑप्टिक फाइबर ढांचे का परस्पर इस्तेमाल आरकॉम भी कर सकेगी।
रिलायंस जियो इंफोकॉम (पूर्व में इंफोटेल ब्राडबैंड) को 2010 में देशभर में 4जी सेवाओं के लिए लाइसेंस मिला था लेकिन कंपनी अभी तक अपनी सेवाएं शुरू नहीं कर पाई है।
सरकार की ओर से हाल ही में उन नियमों को अनुमति प्रदान की है, जिनके तहत रिलायंस जियो इंफोकॉम अपने 4जी स्पेक्ट्रम के इस्तेमाल के जरिए मोबाइल फोन कॉल सेवाएं भी उपलब्ध करा पाएगी।
दोनों भाइयों के बीच कारोबार के बंटवारे के तहत 2005 में रिलायंस कम्युनिकेशन (पूर्व में रिलायंस इंफोकॉम), रिलायंस एनर्जी और रिलायंस कैपिटल अनिल अंबानी के पास चली गई थीं।
इस समझौते से मुकेश अंबानी के लिए दोबारा से मोबाइल फोन सेवा कारोबार में उतरने का रास्ता खुलेगा। साथ ही इससे आरकॉम को करीब 37,360 करोड़ रुपये (31 दिसंबर 2012) के कर्ज के बोझ से कुछ हद तक राहत मिलेगी।