कोरोना संकट के बाद से देश में रोजगार की स्थिति में सुधार हुआ है, पर यह सुधार अब भी महामारी के पहले के लेवल पर नहीं पहुंच पाया है। जनवरी 2020 से तुलना करें तो अक्तूबर 2022 में 14 मिलियन यानी 1.4 करोड़ कम लोगों के पास रोजगार उपलब्ध है। सीसीडीए-सीएमआईई ने अपनी बुलेटिन में इसकी जानकारी दी है। आंकड़ों के अनुसार कोरोना महामारी की पूर्व की तुलना में 45 लाख कम पुरुष और 96 लाख कम महिलाएं फिलहाल रोजगार में हैं।
नवीनतम बुलेटिन में लेखिका प्रीता जोसेफ और रशिका मौदगिल ने बताया कि पिछले तीन वर्षों में युवा व्यक्ति (15-39 आयु वर्ग के लोग) बेरोजगारी से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। अक्टूबर 2022 तक, जनवरी 2020 की तुलना में 15-39 आयु वर्ग के लगभग 20% कम लोगों को रोजगार मिला। इसमें कोरोना संकट के पूर्व की तुलना में 36.5 मिलियन की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, इस दौरान वृद्ध आयु वर्ग (40-59 वर्ष) के लोगों के रोजगार में 12% की वृद्धि हुई। जनवरी 2020 की तुलना में अक्टूबर 2022 में इस आयु वर्ग के अतिरिक्त 25 मिलियन लोगों को रोजगार मिला।
उन्होंने कहा, 'ऐसा इसलिए है क्योंकि 15-39 आयु वर्ग का एक बड़ा वर्ग कार्यबल शामिल हो रहा है। सीएमआईई के एमडी और सीईओ महेश व्यास कहते हैं, “वृद्ध आयु वर्ग मौजूदा कौशल का उपयोग करके अपनी पिछली नौकरियों को बनाए रख रहा है या वापस आ रहा है।” बुलेटिन में कहा गया है कि शुरुआती लॉकडाउन महीनों के बाद पिछले तीन वर्षों में शहरी रोजगार अपेक्षाकृत स्थिर रहा। बुलेटिन के अनुसार पहले लॉकडाउन के बाद समग्र रोजगार में बदलाव मुख्य रूप से ग्रामीण रोजगार में उतार-चढ़ाव से प्रभावित हुआ।