कुल्लू क्षेत्र के बटाला गांव स्थित श्रीकृष्ण मंदिर के साथ अजीबोगरीब मान्यता जुड़ी हुई है। यहां गोबर के लड्डू से भक्तों की मनोकामना पूर्ण होती है। आस्था है कि अपनी मनोकामना के लिए गोबर के लड्डू मंदिर स्थित पानी में डाले जाते हैं। अगर मनोकामना पूर्ण होनी होगी तो लड्डू पानी में तैर जाते हैं और अगर नहीं तो डूब जाते हैं।
यही नहीं, यहां पर भगवान श्रीकृष्ण वर्ष में केवल एक बार भक्तों को दर्शन देने के लिए मंदिर से बाहर आते हैं। हालांकि मंदिर में वर्ष भर भक्तों का तांता लगा रहता है। मंदिर में हर वर्ष माता के दो दौर के नवरात्र, बसंत पंचमी, होलिका दहन (फाग) बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। फाग वाले दिन के नजारे देखने के लिए यहां हजारों की संख्या में कृष्ण भक्तों की भीड़ उमड़ती है। रातभर दूरदराज से आए लोग मंदिर परिसर में पहाड़ी नाटियों का आयोजन करते हैं।
नजारा उस समय आलौकिक रूप लेता है जब सुबह के चार बजे ब्रह्ममुहूर्त में होलिका दहन किया जाता है। मंदिर परिसर में मंत्रोच्चार के साथ होलिका दहन की तैयारियां पूर्ण कर दी जाती हैं। इसके लिए चहुं ओर दर्जनों विशालकाय मशालें प्रज्वलित की जाती हैं। इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण अपने पूरे वाद्ययंत्रों सहित ध्वनिगत पालकी में मंदिर परिसर में बाहर ला जाते हैं। वर्ष में एक बार साक्षात कृष्ण के दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त होता है।
वहीं, अपने घर को लौटते वक्त तो बटाला गांव के लोग भगवान संग रंगों की होली भी खेलते हैं। मंदिर के कारदार रामानंद और पुरोहित ब्रह्मानंद शर्मा बताते हैं कि गोबर के लड्डुओं की मान्यता यहां वर्षों से चली आ रही है। लोगों की इसमें अटूट आस्था है। क्षेत्र में भगवान मुरली मनोहर का यह एक मात्र मंदिर हैं जहां हजारों कृष्ण भक्तों का तांता लगा रहता है।