सूफी संतों की नगरी ‘अमरोहा’ यूं ही दुनिया में मशहूर नहीं। ढोलक के साथ हैंडलूम कारोबार ने भी विदेशों में अपनी धमक बनाई है। बुनकरों के हुनर का डंका अमेरिका में भी खूब बज रहा है। बहुत कम लोग जानते होंगे कि अपनी सरजमीं पर बुनी कालीन ने ‘व्हाइट हाउस’ को भी मखमली बना दिया है। विदेशी तो दूर खुद अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा भी इस हुनर के कायल हैं।
यूं तो हर शहर की पहचान उसके अपने हुनर और कुव्वत से होती है। लेकिन यदि यह पहचान सात समंदर पार अपने हुनर का परचम लहराए तब पूरे देश का इस पर इठलाना तो लाजमी है ही। अब अमरोहा के हैंडलूम कारोबार को ही लीजिए। खड्डियों पर कारीगारों की अंगुलियां थिरकती हैं, तो यही हाथ सूत और रेशम से कॉटन पर चुटकी में लाजवाब डिजाइन तैयार कर देते हैं। कलाकारी ऐसी कि एक्सपोटर्स भी इन डिजाइन में उलझकर इन पर फिदा हो बैठते हैं।
अपनी पहचान बचाने की जद्दोजहद में जुटा जिले का छोटा सा कस्बा नौगावां सादात इस कारोबार के अस्तित्व को बचाने की जुगत में भले ही रात-दिन लगा हो, लेकिन आज भी कस्बे के साथ-साथ मखदूमपुर, खेड़ा अपरौला, गजस्थल, धनौरी मीर व नगली शेख गांव में दर्जनों कारखाने में लगीं मशीनों पर हुनरमंद हाथ अपनी कारीगर का लोहा मनवाने में लगे हैं।
इस हैंडलूम की खूबी यह है कि मशीनरी से काम नहीं होता, बल्कि लकड़ी के ढांचे पर कारीगर अपना हुनर दिखाते हैं। धागों से बेड शीट, चादरें और कालीनें बनाई जाती हैं। करीब चार बरस से नौगावां आर्टिसंस ने तो हैंडलूम कारोबार में जान फूंक दी है।