सोनीपत के इंडस्ट्रियल एरिया स्थित अस्पताल में एक महिला ने ऐसी बच्ची को जन्म दिया, जिसके दो मुंह, दो रीढ़ और एक पेट है। जन्म लेने वाली यह नवजात शाम होने-होने तक पूरे जिले में चर्चा का विषय बन गई है। कोई इसे भगवान का अजूबा कह रहा है तो कोई इसे अविकसित भ्रूण का परिणाम बता रहा है।
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दूसरी ओर दो मुंह वाली बच्ची के जन्म से माता-पिता भी पहली बार में तो खुश नजर आते हैं, लेकिन डॉक्टरों की बात सुनने के बाद थोड़े परेशान हो जाते हैं। डॉक्टर कहते हैं कि इस तरह से जन्म लेने वाले बच्चे बहुत कम समय तक जीवित रहते हैं।
यूपी के हैं माता-पिता
गांव अतरजी, जिला हरदोई, उत्तर प्रदेश के रहने वाले बच्ची के पिता सुभाष कुमार, हालांकि अब ये शहर के राजीव नगर में रहते हैं। सुभाष कुमार एटलस साइकिल में पंचिंग आपरेटर हैं।
करीब आठ वर्ष से पत्नी उर्मिला के साथ सोनीपत में बसे सुभाष कुमार ने बताया कि उनका बड़ा लड़का पांच वर्ष की उम्र में गुजर गया था। वहीं अब एक बेटी है जोकि लगभग साढ़े 3 साल की है।
सुबह 11 बजे दिया जन्म
दो मुंह वाली इस बच्ची का जन्म सुबह लगभग 11 बजे हुआ था। इंडस्ट्रियल एरिया स्थित सिग्नस जेके हिंदू अस्पताल में इस बच्ची की डिलीवरी ऑपरेशन के जरिए हुई।
लगभग आधे घंटे तक चले इस आपरेशन के बाद से जच्चा-बच्चा स्वस्थ हैं। मां को जहां सामान्य रूप से वार्ड में भर्ती किया गया है, वहीं बच्ची को न्यू नैटल इंटेसी केयर यूनिट (एनआईसीयू) में रखा गया है।
जन्म के समय बच्ची का वजन 3.5 किलोग्राम था। इस आपरेशन में अस्पताल की डा. शिखा मलिक की अहम भूमिका रही।
पहले लग गया था पता
सुभाष अपनी पत्नी को दो-तीन माह पहले रेगुलर चेकअप के लिए ही अस्पताल में लाए थे। उस समय डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड करवाने की सलाह दी थी। अल्ट्रासाउंड करवाने पर पता चला कि बच्चे के तो दो मुंह हैं। बस फिर इसके बाद क्या था, तब से उर्मिला को खास देखरेख में रखा जा रहा था। अल्ट्रासाउंड के उपरांत एमआरआई भी करवाया गया।
डॉक्टर भी हैरत में
गुरुवार को बच्ची के जन्म के बाद फिर से एमआरआई करवाया गया। एमआरआई में साफ तौर पर पता चला कि बच्ची के दो रीढ़ की हड्डी है।
दो रीढ़ की हड्डी देखकर डॉक्टर भी हैरत में पड़ गए। दो मुंह होना फिर भी एक लाख बच्चों में एक केस मिल जाता है, लेकिन अलग रीढ़ की हड्डी होना और भी दुर्लभ है।
मेडिकल भाषा में इसे कोनज्वाइंड ट्वींस कहते हैं। अस्पताल के डॉक्टरों का दावा है कि इस तरह का मामला सोनीपत ही नहीं बल्कि आसपास के जिलों में भी पहला है।
कोनज्वाइंड ट्वींस के बारे में दो धारणाएं हैं। पहली यह कि फिजन यानि विखंडन। इसके तहत निषेचित अंडे आंशिक रूप से विभाजित होते हैं, लेकिन पूरी तरह से विभाजित न होने के कारण आपस में जुड़े ही रह जाते हैं।
दूसरी धारणा यह है कि फ्यूजन की यानि संलयन। इसमें एक निषेचित अंडा पूरी तरह से अलग हो जाता है, लेकिन दोनों की स्टेम सेल एक जैसी होने के कारण दोनों आपस में मिल जाते हैं।
विज्ञान की भाषा में कोनज्वाइंड ट्वींस के पिता सुभाष कुमार इसे भगवान का चमत्कार मानते हैं। सुभाष कुमार ने कहा कि भगवान की दया है कि उनकी बच्ची और पत्नी ठीक है।
उन्हें बच्चे के दो मुहं होने के बारे में पहले से पता था। उसके बाद से बस यही प्रार्थना कर रहे थे कि बच्चा ठीक-ठाक हो जाए। सुबह आपरेशन के बाद जब डॉक्टरों ने कहा कि सबकुछ ठीक है, तब जाकर जान में जान आई।