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हौंसले से तोड़ी हैं दुश्वारियों की दीवारें

Sat, 16 Feb 2013 12:29 PM IST
गोरखपुर/शरद पाण्डेय
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इनसान में हौंसला हो तो दुश्वारियां उसके कदमों को नहीं रोक सकतीं। मुंबई के उड़ान बैंड ग्रुप ने यह साबित कर दिखाया है। कहां तो लोग विकलांगता को अभिशाप मानकर आत्मविश्वास खो देते हैं और समाज की मुख्यधारा से कट जाते हैं लेकिन दृष्टिबाधित कलाकारों का यह ग्रुप आत्मविश्वास की बदौलत ही नित नये मुकाम हासिल कर रहा है। यह कलाकार टीवी शोज के अलावा देश भर में करीब तीन सौ तथा अमेरिका और केन्या में भी लाइव शो कर चुके हैं।
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उड़ान बैंड के ग्रुप लीडर दीपक बेदसा बताते हैं कि दृष्टिबाधित स्कूल में संगीत विषय अनिवार्य होता है। स्कूल में संगीत की तालीम के दौरान ही सहपाठियों को साथ लेकर बैंड ग्रुप बनाने का खयाल आया। तब सोच यही थी कि इससे सभी साथियों को संगीत के जरिए स्वरोजगार मिलेगा। स्कूल के ही 15 साथियों के साथ वर्ष 2005 में उड़ान बैंड ग्रुप की नींव रखी और मुंबई में पहला लाइव शो किया।

दीपक कहते हैं कि पहले आयोजन के बाद लगातार शो मिलते गए और यह ग्रुप लगातार आगे बढ़ता रहा। यह ग्रुप ‘इंडिया हैज गाट टैलेंट’, ‘कॉमेडी का डेली शो’ जैसे टीवी कार्यक्रमों के साथ ही मुंबई रेडियो मिर्ची पर भी प्रस्तुति के जरिये अपनी प्रतिभा की नजीर पेश कर रहा है। सहयोग की बात पर दीपक कहते हैं कि फिल्मी गायक अभिजीत भट्टाचार्य ने उन्हें मुंबई में दुर्गा पूजा के तीन शो दिए तो गायक अभिजीत सावंत, शंकर एहसान लॉय तथा अभिनेता विक्रम गोखले उड़ान बैंड ग्रुप के शो में शामिल हो चुके हैं।
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अभिनेता सलमान खान के सहयोग से यह ग्रुप ‘उड़ान इंस्ट्रूमेंटल’ नाम से अलबम भी लांच कर चुका है। दीपक अपनी सफलता का श्रेय ग्रुप के संस्थापक केवल हरिया को देते हैं। दीपक बताते हैं कि अब इस ग्रुप के सदस्यों की संख्या 60 हो चुकी है इसमें दृष्टिबाधित लोगों के अलावा अन्य विकलांग भी शामिल हैं। सोच आज भी वही है कि लोग जिन्हें असहाय समझते हैं वे आत्मनिर्भर बनकर दूसरों को भी सहारा दे सकें।

इन साज़िन्दों ने सजाई शाम
:- नितेश सोनावड़े उड़ान ग्रुप के साथ पिछले चार साल से जुड़े हुए हैं और कीबोर्ड बजाते हैं। संगीतकार शंकर, एहसान और लॉय के साथ किये गए शो को वह यादगार बताते हैं। वह कहते हैं कि ग्रुप से जुड़कर आत्मनिर्भर बनने का मौका मिला है।

:- सरफराज कुरैशी बैंड ग्रुप की स्थापना के साथ ही जुड़े हुए हैं। कीबोर्ड बजाने वाले सरफराज कहते हैं कि हमने शून्य से सफर की शुरुआत की थी और आज इस मुकाम पर पहुंचे हैं। हर हाल में ग्रुप के सदस्यों ने एक दूसरे का भरपूर साथ दिया है।

:- स्कूल में दीपक के सीनियर रहे अशोक आर्या भी शुरुआती दौर से ही ग्रुप में हैं। ढोलक कोंगो बजाने वाले अशोक आरडी बर्मन को अपना आदर्श मानते हैं। विदेशों में भी शो करना और ग्रुप को आगे ले जाना वह अपना लक्ष्य बताते हैं।

:- सचिन गाइकार स्कूल में दीपक के जूनियर रहे हैं वह कहते हैं कि बड़ी मेहनत के बाद आज ग्रुप इस मुकाम पर पहुंचा है। साइड रिदम्स वादक सचिन का कहना है कि पिछली चीजों को याद कर आगे बढ़ने के लिये नया उत्साह मिलता है।

:- अगस्टन इस बैंड ग्रुप में ट्रैंगल ड्रम बजाते हैं। ग्रुप की बात होती है तो उत्साहित अगस्टन कहते हैं कि शुरुआती दौर में मुश्किलें भी आईं लेकिन ग्रुप के सदस्य हमेशा एक दूसरे के साथ कंधे से कंधा मिला कर खड़े रहे। यही हमारी ताकत है।

:- ढोलक तबला वादक दीपक कामले का कहना है कि ग्रुप के सभी सदस्यों ने अपने वाद्ययंत्र खुद खरीद रखे हैं इसलिए यहां कोई किसी पर निर्भर नहीं है। वह कहते हैं- ग्रुप हमेशा ऐसे ही आगे बढ़ता रहे। यही सपना और यही लक्ष्य है।
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