कहते हैं सीखने की कोई उम्र नहीं होती। किसी भी उम्र में शिक्षा ग्रहण की जा सकती है, लेकिन ऐसा विरले ही कर पाते हैं। शिक्षा के प्रति इस लगन को चरितार्थ किया है हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा के एक 68 वर्षीय रिटायर्ड अध्यापक ने।
इन्होंने 47 वर्ष तक अध्यापन कार्य से जुड़े होने के बाद इसी साल 12वीं की परीक्षा पास की। उपमंडल देहरा की ग्राम पंचायत रोड़ी-कोड़ी निवासी वीरबल संधू ने वर्ष 1964 में मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण की थी।
वर्ष 1966 में जेबीटी कोर्स करने के बाद अध्यापन कार्य को अपना कैरियर बनाया। 47 वर्ष तक शिक्षा विभाग में अपनी सेवाएं देने के बाद 30 जून, 2003 को सेंट्रल हेड टीचर के पद से रिटायर्ड हुए संधू शिक्षा के प्रति अलग ही जज्बा लिए हुए हैं।
यह पूछे जाने पर कि रिटायरमेंट के दस साल बाद उनके मन में पढ़ाई करने की इच्छा कैसे पैदा हुई। वीरबल कहते हैं उन्हें कम शिक्षा ग्रहण करने का हमेशा मलाल रहा।
बस अपनी इसी इच्छा पूर्ति को उन्होंने पढ़ाई करने की ठानी है। वीरबल संधू ने कहा कि भले ही इस उम्र में इन्हें शिक्षा से कोई विशेष लाभ न मिलने वाला हो। बावजूद इसके वह स्नातक तक पढ़ाई करने का सपना संजोए हुए हैं।