जरा याद कीजिए शोले का सीन। बसंती पर गब्बर की बुरी नजर और वीरू का कहना....बसंती इन...। लेकिन आज टाइम बदल गया है। रामगढ़ रिजार्ट में गब्बर स्पा मास्टर है तो बसंती होस्टेस के लुक में कस्टमर की सेवा में लगी है। बात हो रही है विख्यात फिल्म 'शोले' के शूटिंग स्थल यानी रामगढ़ की। रामगढ़ नाम तो फिल्मकार ने रखा था, इस गांव का असली नाम रामनगरम है।
रामनगरम बंगलूरू और मैसूर के बीच ऊंचे पठारों की गोद में बसा है। किसी से जरा सी बात पूछ लीजिए तो भारी आवाज में जवाब मिलता है कहां से आए हो? इस आवाज में इतनी कड़क होती है कि आपको बरबस फिल्म शोले के गब्बर सिंह की याद आ जाएगी। यहां आपको ठाकुर भी मिलेंगे और गब्बर भी।
शोले को मिली सफलता के बाद ये गांव न सिर्फ एक टूरिस्ट डेस्टिनेशन बन चुका है, बल्कि यहां एक रामगढ़ रिजार्ट एंड स्पा सेंटर की भी शुरुआत हो चुकी है। यहां की लंबी चौड़ी पहाड़ियां एडवेंचर पसंद करने वालों को खूब लुभाती हैं और गांव के पास से गुजरने वाली पटरियां व गांव के पास से बहती नदी हर कुछ यहां से गुजरने वाले टूरिस्टों को सुकून देती है। आज भी गांव का माहौल वही है, जैसा करीब 40 साल पहले शूटिंग के समय था। एक सुविधा यह भी है कि यहां सुबह से शाम तक कभी भी विजिटर्स आ सकते हैं।
हर दिल में बसे हैं शोले के कैरेक्टर
शोले में गब्बर सिंह (अमजद खान), बसंती (हेमामालिनी), जय (अमिताभ बच्चन) और वीरू (धर्मेंद्र) के कैरेक्टर गांववासियों के दिल में तो बसे ही थे। अब रामगढ़ रिजार्ट और स्पा में भी मैनेजर ठाकुर और स्पा मास्टर गब्बर के रोल में रहता है। यह रिजार्ट एंड स्पा सेंटर 6.6 एकड़ में शुरू हुआ था और अब भी फिल्म के मैजिक को जीवंत कर रहा है। आज भी यहां कितने आदमी थे..., तेरा क्या होगा कालिया... जैसे डायलॉग बोले जाते हैं। इस रिजार्ट में बसंती के लुक में होस्टेस होती हैं और रेस्टोरेंट्स के नाम गब्बर का अड्डा और ठाकुर की हवेली रखा गया है। यहां रहने वाले राकेश पाटिल ने कहा कि शोले ने जितनी सफलता हासिल की, उससे कहीं ज्यादा सफलता इस गांव को मिली है। यहां काफी तरक्की हुई है। इधर आने वाला कोई ऐसा टूरिस्ट नहीं है जो यहां से होकर न जाता हो।