कई बार कहा जाता है कि अपराध करने के लिए आम लोगों से ज्यादा अक्लमंदी की जरूरत होती है। लेकिन अपराध को अंजाम देने के बाद जेल से भागने के लिए जिस चतुराई की जरूरत है, वह केरल के इस कैदी से ज्यादा शायद ही किसी के पास हो।
पुलिस ने रिप्पर जयनंदन की तलाश में एक बड़ा अभियान छेड़ दिया है, जो अपनी जगह एक पुतला रख चंपत हो गया और जेल गार्ड इस भ्रम में पड़े रहे कि वह अपने सेल में सोया हुआ है।
इस दुर्दांत अपराधी पर सात महिलाओं के कत्ल का आरोप लगा, हालांकि केवल दो हत्याओं में इसे सजा हुई। सूत्रों के मुताबिक जयनंदन के साथ एक और कैदी भागने में कामयाब रहा, जो चोरी के मामले में सजा काट रहा था।
हालांकि, यह जयनंदन के लिए कोई नई बात नहीं है। 2010 में वह कन्नूर के सेंट्रल जेल से फरार हो गया था। इसके लिए उसने खास रणनीति बनाई। कई दिनों तक भूखा रहकर वजन घटाया और जब बेहद पतला हो गया, तो सलाखों के बीच से निकला और जेल की दीवार फांदकर फरार हो गया।
इस बार तो जेलर पूरी तरह से धोखे में आ गए। जेलर जयनंदन के सेल के बाहर बराबर गश्त कर रहे थे, लेकिन उन्हें कतई अहसास नहीं हुआ कि वह भाग निकला है। दरअसल, जयनंदन ने तकिए और चादर से एक पुतला तैयार किया और उसे अपने सोने की जगह रख दिया था।