सूंड के बिना हाथी की कल्पना कर पाना भी मुश्किल है। शायद किसी ने कभी अंदाजा भी नहीं लगाया होगा कि हाथी सूंड के बिना हो भी सकता है।
लेकिन आप ये सुनकर अचरज में पड़ जाएंगे कि प्रागैतिहासिक काल में हाथियों की सूंड नहीं हुआ करती थी।
डेली मेल की खबर के अनुसार, प्रागैतिहासिक हाथियों में एक अलग किस्म की सूंड हुआ करती थी। जो काफी हद तक बड़े चमचे की तरह होती थी।
ये हाथी इस प्रकार की सूंड का इस्तेमाल कठोर शाक-सब्जियों को काटने में किया करते थे। हालांकि वैज्ञानिकों का मानना है कि ये हाथी मूल रूप से पानी में रहा करते थे।
ऐसे में चप्पू समान उनकी सूंड उन्हें खाना खोजने और पानी को छानने में मदद करती थी। वैज्ञानिकों को इन प्रागैतिहासिक हाथियों के कई जीवाश्म मिले हैं, जिसके आधार पर वैज्ञानिकों ने ऐसी सूंड होने का अनुमान लगाया है।
आज कल के हाथियों की ही तरह ऐसा माना जाता है कि प्लेटीबेलोडोन प्रजाति के ये हाथी अपनी विशेष सूंड से ही खाना खाते होंगे लेकिन उनकी ये सूंड उन्हें कठोर शाक-पत्तियों को काटने में मदद करती होगी।
ये हाथी आकार में अफ्रीकी हाथियों से थोड़े छोटे हुआ करते थे।
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