नवरात्र में पूजा अर्चना के लिए जहां लोग घर परिवार में रहते हैं वहीं कुछ लोग इन दिनों में घर छोड़ देते हैं। गांव, समाज और परिवार की सलामती के लिए करमहां गांव के लोग दिन-भर के लिए घर छोड़ देते हैं।
गांव के बाहर ही एक बगीचे में दिन बिताने के साथ ही वहीं खाना-पीना तक करते हैं। शाम होते ही घर लौट आते हैं। गांव के लोग हर तीन साल पर चैत्र नवरात्र में ऐसा करते हैं। गांव के लोग बताते हैं बहुत समय से ऐसा होता आ रहा है।
करमहां गांव के लोग अनूठी पूजा करते हैं। नवरात्र के दौरान करमहां के लोग एक दिन के लिए घर छोड़ देते हैं। हालांकि गांव के कुछ लोग अपने घरों में ही रहते हैं। शुक्रवार को दिन में इस पूजा की वजह से करमहां गांव में सन्नाटा रहा। गांव के बाहर जगह-जगह टेंट लगाकर लोग दिन गुजरने का इंतजार करते रहे। सुबह घरों में झाडू़ तक नहीं लगाई गई थी। यहां के कुछ लोगों से बातचीत की गई।
करमहां की तारा देवी (75) कहती हैं कि यह रिवाज लंबे समय से चला आ रहा है। वे कहती हैं कि उनके पूर्वज भी ऐसा करते चले आ रहे हैं। वे कहती हैं कि लोग बिना स्नान किए ही घरों से बाहर निकलते हैं। वे बताती हैं कि गांव के लोग सीधे घरों से निकलकर पश्चिम की ओर चले जाते हैं।
हालांकि गांव के कुछ लोग ऐसा नहीं भी करते हैं। यहां के रहने वाले विंध्यवासिनी सिंह कहते हैं कि परंपरा का निर्वहन वे लोग करते चले आ रहे हैं। नवरात्र का मौका होने की वजह से सब लोग सुबह ही मां काली और दुर्गा की पूजा करते हैं। यह लंबे समय से चला आ रहा है। शायद पूजा-पाठ की देन है कि गांव और यहां के रहने वाले सलामत हैं।