अगर आप यह सोचकर हैरान हो रहे हैं कि भला फटे पुराने कपड़ों से तकदीर कैसे बदल सकती है तो आप भी बिहार के मधेपुरा जिले में उदाकिशुनगंज गांव जाकर इस हकीकत को अपनी आंखों से देख सकते हैं। आस-पास के इलाकों में उदाकिशुनगंज गुदड़ी बाबा के गांव के नाम से प्रसिद्घ है। यहां बरगद का एक पेड़ फटे और पुराने कपड़ों से लदा दिख जाए तो आप समझ जाएंगे कि सही जगह पर आ गए हैं।
आस्था का केन्द्र है यह वृक्ष
इस गांव में एक बरगद का वृक्ष है। यह पेड़ यहां के लोगों में आस्था और श्रद्धा का केन्द्र है। लोगों का मानना है कि इस वृक्ष के सामने हाथ जोड़कर व्यक्ति जो भी श्रद्धा भाव से मांगता है उसकी मुराद पूरी होती है। मुराद पूरी होने के बाद लोग गुदड़ी यानी फटे पुराने कपड़े लाकर इस पेड़ पर चढ़ाते हैं।
गुदड़ी बाबा रहते हैं वृक्ष पर
मान्यता है कि गुदड़ी बाबा बरगद के वृक्ष पर रहते हैं वही सबकी मुराद पूरी करते हैं। इस वृक्ष की ख्याति दूर-दूर तक फैली हुई। प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग यहां अपनी मनोकामना लेकर आते हैं और काम पूरा होने पर फटे पुराने कपड़े बरगद की डाली पर चढ़ाकर धन्यवाद करते हैं। यहां आने पर दूर से ही फटे पुराने कपड़ों से लदा बरगद का पेड़ दिख जाता है।
परंपरा
गुदड़ी बाबा के यहां फटे पुराने कपड़े चढ़ाने की शुरुआत कब से हुई, इसका कोई विश्वसनीय विवरण नहीं है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह वर्षों पुरानी परंपरा है। लगभग 100 वर्षें से भी अधिक समय से यह परंपरा चली आ रही है।