मनुष्य जीवन से जुड़ी कई खोजों की कड़ी में अब विज्ञान ने मौत का समय भी खोज निकाला है। वैज्ञानिकों ने पहली बार जीन में एक ऐसी विसंगति को ढूंढा है जो यह निश्चित करती है कि रोज आपके सोकर उठने का समय क्या होगा। साथ ही यही जीन तय करती है कि व्यक्ति की मौत दिन के किस समय होने की आशंका ज्यादा है।
हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के शोधकर्ताओं ने एक अध्ययन में इस जीन की पहचान की है। यह जीन दिन में एक ही समय उठने वाले या रातभर जागते रहने वाले लोगों की जनसंख्या को प्रभावित करता है। साथ ही यह परिवर्तन यह भी पता लगा सकता है कि किसी व्यक्ति की मौत दिन के किस समय होने की आशंका है। अध्ययन में मिले इन नतीजों से काम का समय बदलने, चिकित्सीय उपचार की योजना बनाने और नाजुक हालत वाले मरीजों की स्थिति का जायजा लेने का समय तय किया जा सकता है।
अध्ययन के प्रमुख लेखक एंड्रयू लिम ने कहा कि हमारी आंतरिक जैविक घड़ी मानवीय जीव विज्ञान और व्यवहार के कई पक्षों को नियंत्रित करती है। इनमें सोने का समय, संज्ञान आधारित प्रदर्शन का समय और कई अन्य शारीरिक क्रियाओं का समय शामिल है। हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के प्रोफेसर सैपर ने एक बयान में कहा कि आभासी रूप से सभी शारीरिक क्रियाओं की एक लय होती है। मतलब यह हुआ कि मृत्यु की भी एक लय है।