हम और आप तो रोज रात को शांत वातावरण में चैन की नींद लेते हैं। दिन में काम और रात में आराम। यही धरती की दिनचर्या है। लेकिन अंतरिक्ष में बैठे उन यात्रियों का क्या जो अंतरिक्ष में भारी शोर के चलते सो नहीं पाते। ऐसे यात्रियों के लिए अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र पर अनिद्रा की शिकायत को दूर करने के लिए अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने नई योजना बनाई है। इसके तहत नासा केंद्र पर नए हाई-टेक एलईडी बल्ब लगाएगा। इस बल्ब की रोशनी से अनिद्रा संबंधी समस्या नहीं होगी। साथ ही अंतरिक्षयात्रियों की दवा पर से निर्भरता भी कम हो जाएगी।
इस बल्ब की खासियत है कि दिन में समय के अनुसार इसकी रोशनी नीली, सफेद और लाल होती जाती है। हालांकि इस योजना के वर्ष 2016 तक पूरा होने की उम्मीद है। गौरतलब है कि अंतरिक्ष केंद्र पहुंचने वाले अधिकांश लोगों को नींद के लिए दवा का सहारा लेना पड़ता है, जिससे उनके शरीर को पूरा आराम मिल सके। नासा के फ्लाइट सर्जन स्मिथ जॉनस्टन के अनुसार, असामान्य वातावरण एवं काम के दबाव के कारण अंतरिक्षयात्रियों को अनिद्रा की शिकायत हो जाती है। वैसे भी, अंतरिक्ष में नींद आना कोई छोटी बात नहीं।
उन्होंने कहा कि अध्ययन से पता चला है कि रात के समय अस्पताल का स्टाफ ज्यादा गलतियां करता है। नतीजे बताते हैं कि लोगों के पास दिन-रात का अलग समय होता है, जिसका सम्मान होना चाहिए। भले ही वे अंतरिक्ष से संबंधित अति महत्वपूर्ण काम ही कर रहे हों। नासा के प्रमुख फिजीशियन ने कहा, ‘जब आपके घरों, स्कूलों या अस्पताल की खिड़कियों से सामान्य रोशनी आती है तो आपका प्रदर्शन अच्छा होता है।’
क्यों होती है अनिद्रा की शिकायत
नासा के प्रमुख फिजीशियन स्मिथ जॉनस्टन ने बताया अंतरिक्ष केंद्र पर काफी शोर होता है। वहां कार्बन डाई आक्साइड अधिक है। 24 घंटे आप कैमरे के सामने होते हैं, ऊपर से काम का दबाव, ऐसे में अनिद्रा की शिकायत होने लगती है। इसके बाद अवसाद, गलतियां, चिड़चिड़ाहट की संभावना बढ़ जाती है।