रविवार के बाद सोमवार से नए सप्ताह की शुरूआत होती है। आमतौर पर कामकाजी लोग सोमवार को नीरज, दबाव भरा और बुरा मानते हैं। लोगों की राय में एक दिन की छुट्टी के बाद सोमवार को काम पर आना उन्हें पसंद नहीं और यही कारण है कि लोग मंडे को बिलकुल पसंद नहीं करते। लेकिन हमारी और आपकी ये राय उतनी सटीक नहीं है। दरअसल जमाना बदलने के साथ साथ लोगों की राय बदली है और मंडे को मनहूस मानने का सिलसिला कम हुआ है।
हाल ही में कराए गए एक सर्वे के मुताबिक सोमवार आम दिनों की तरह ही है। तीन लाख चालीस हज़ार कामकाजी लोगों पर कराए गए इस सर्वे के आश्चर्यजनक परिणाम देखने को मिले। इसे मनहूस मानने वालों की संख्या में 20 फीसदी कमी आई है। अधिकांश कामकाजी लोगों की नजर में मंगलवार, बुधवार और गुरुवार भी ठीक वैसे ही हैं जैसा सोमवार।
अमरीकी शोधकर्ताओं के इस सर्वे में तीन लाख चालीस हज़ार लोगों के मूड का जायजा लिया गया। इससे पता चला कि शुक्रवार को छोड़कर हफ्ते के बाकी कामकाजी दिन उनके लिए एक जैसे ही हैं, चाहे वो सोमवार हो या फिर कोई और दिन। लेकिन सप्ताह के आखिरी दिन शुक्रवार आते आते वे खुश होते जाते हैं क्योंकि इसके बाद छुट्टी के दो दिन होते हैं।
अध्ययनकर्ताओं में से एक प्रोफ़ेसर आर्थर स्टोन ने 'जर्नल ऑफ पॉजिटिव साइकॉलोजी' को बताया कि सोमवार के बारे में जो आम धारणा है, उसे बदला जाना चाहिए क्योंकि यह अब उतना मनहूस नहीं रहा जितना इसे माना जाता रहा था। स्टोनी ब्रुक यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर आर्थर स्टोन का कहना है कि सोमवार के बारे में संसार भर में प्रचलित धारणा के बावजूद वो इस नतीजे पर पहुंचे हैं।