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एक मंदिर ऐसा, जहां मिसाइलों की होती है पूजा अर्चना

Mon, 18 Mar 2013 08:30 AM IST
व्हीलर द्वीप (ओडिशा)।
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आप मंदिर क्यों जाते हैं? ताकि भगवान की अर्चना के साथ साथ शांति का अनुभव कर सकें। लेकिन एक मंदिर ऐसा है जहां भगवान नहीं मिसाइलें ही भगवान स्वरूप पूजी जाती हैं। ओडिशा के व्हीलर द्वीप पर बना यह दुनिया में अपनी तरह का एकमात्र मंदिर है। भारत की लगभग सभी मिसाइलों का प्रक्षेपण इसी द्वीप से किया जाता है।
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दिलचस्प बात यह है कि हर लांच से पहले यहां स्थित शिवमंदिर में इन मिसाइलों की सफलता की कामना की जाती है। मिसाइल पुरुष डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम हों या अग्नि पुत्री कहलाने वाली अग्नि परियोजना की निदेशक टेसी थामस या फिर मौजूदा रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन प्रमुख वीके सारस्वत, सभी इस मंदिर में शीश नवाने आते रहे हैं।

भारतीय वैज्ञानिकों ने एक मिसाइल के परीक्षण से ही व्हीलर द्वीप खोजा था। मिसाइल दागने के बाद जब समंदर में उसकी खोज हुई तो जहाजों को वह कहीं नहीं मिली। आखिरकार यह डेढ़ वर्ग किलोमीटर का द्वीप दिखाई दिया जहां उस मिसाइल का मलबा पड़ा हुआ था। जहां यह मलबा पाया गया था, उसे आज पृथ्वी प्वाइंट कहा जाता है।
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एक रक्षा वैज्ञानिक ने बताया कि इसी द्वीप पर एक छोटा सा मंदिर भी पाया गया। कोई आबादी न होने के बावजूद मंदिर की मौजूदगी आश्चर्यजनक थी। बाद में डीआरडीओ ने इस मंदिर का विकास कराया और मंदिर में भारत की मिसाइलों की सफलता के लिए मन्नत मांगी जाने लगी।

ऐसे होती है पूरी प्रक्रिया
हर प्रक्षेपण से पहले इस मंदिर के पुजारी को किसी पुरोहित की तरह बुलाया जाता है। मंदिर के प्रांगण में पल्ला बिछाया जाता है। वहां 11 नारियलों के साथ पूजा होती है। देश के मिसाइल वैज्ञानिक एक-एक करके नारियल फोड़कर मंदिर में नतमस्तक होते हैं। और फिर वैज्ञानिक आश्वस्त होकर अपने-अपने कंप्यूटरों की राह पकड लेते हैं।

पर्वत की चोटियों पर लगे हैं कैमरे
मिसाइल के परीक्षण के समय द्वीप पर कोई नहीं रह सकता। मिसाइल दागे जाते समय एक बडे़ इलाके में आग लग जाती है और वहां खड़ी अग्निशमन की गाड़ियां सक्त्रिस्य हो जाती हैं। परीक्षण के समय के फोटो लेने के लिए व्हीलर द्वीप के आसपास के कुछ द्वीपों की पर्वत चोटियों पर कैमरे लगाए गए हैं। ये कैमरे 200 किलोमीटर तक की परिधि के सटीक चित्र ले सकते हैं।
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