भई, मूछें हो तो नत्थूलाल जैसी...। शराबी फिल्म का यह डायलॉग भले ही अभी भी उतना ही प्रसिद्ध हो, लेकिन बिशनपुरा गांव में शंभूनाथ गौड़ की मूंछें देखकर कहा जाता है कि मूंछें हो तो शंभूनाथ जैसी वरना न हों।
पैतृक गांव में एक बुजुर्ग श्रवण कुमार को अपनी मूंछें कान पर चढ़ाकर रखकर देखने के बाद उन्होंने तय किया कि वे अपनी मूंछों को इससे भी बड़ा करेंगे। अब उनकी मूंछें 32-32 इंच तक लंबी हैं।
शंभूनाथ यहां सेक्टर 18 के एक रेस्त्रां में गार्ड की नौकरी करते हैं। यहां आने वाले लोग उनकी मूंछ को सहलाते हैं और उनके साथ फोटो खिंचवाते हैं। शंभू रोज शैंपू करने के अलावा जैतून का तेल मूंछों पर लगाते हैं। 50 वसंत देख चुके शंभू के अनुसार सफेदी छिपाने के लिए समय-समय पर उन्हें अपनी मूंछों को रंगना भी पड़ता है।
मूल रूप से गोरखपुर निवासी शंभू इन दिनों अपने तीन बेटों के साथ बिशनपुरा में रहते हैं। गांव वाले उन्हें यहां प्यार से मूंछ कहकर बुलाने लगे हैं। उन्होंने बताया कि अभी तक किसी ने उनका मार्गदर्शन नहीं किया था, लेकिन अब वह यह पता करा रहे हैं कि लिम्का व गिनीज बुक में कितनी लंबी मूंछों का रिकॉर्ड है।
उनकी कोशिश होगी वे लंबी मूंछों का रिकॉर्ड तोड़ें। शंभू का कहना है कि मूंछों के बिना मर्द अधूरा है। रेस्त्रां में आने वाले युवकों को वे मूंछें रखने के लिए प्रेरित करते हैं। शंभू का कहना है कि उत्तर प्रदेश में लंबी मूंछों का शौक लोग नहीं रखते जबकि राजस्थान के गांवों में लोग लंबी मूंछों के साथ चौपाल में बैठे दिख जाएंगे।