हर इंसान चाहता है कि वो जहां कहीं भी काम करे, उसे सुकून और राहत भरा माहौल मिले। अच्छा काम देने के लिए अच्छा माहौल और सहूलियतें होना जरूरी है।
लेकिन कुछ नौकरियां ऐसी होती हैं जिनमें भाग-दौड़ बहुत होती है और सुकून मिलना मुश्किल होता है।
एक ऐसी ही नौकरी में ये लड़का भी था। नौकरी थी एमरजेंसी सर्विसेज प्रोवाइड करने वाले संस्थान में एमरजेंसी के लिए गाड़ियां इधर-उधर दौ़ड़ाते रहना।
हो गया था परेशान
संस्थान के डेस्किंग पॉलिसी के हिसाब से किसी भी कर्मचारी की कोई फिक्स सीट नहीं बनाई गई थी।
साथ ही ऐसा भी था कि अगर कोई जरूरतमंद शख्स या फिर अगले शिफ्ट का बंदा पहले से आकर खड़ा हो जाए, तो काम कर रहे कर्मचारी को अपनी कुर्सी छोड़ने पड़ेगी।
30 साल के नेथन राबर्ट के साथ ऐसा रोज होता कि उसे अपनी कुर्सी काम के दौरान ही छोड़नी पड़ती। इससे वो बेहद तनाव में आ गया था।
छोड़ दी नौकरी
मिडलटीन के रहने वाले नेथन ने इस बात को गौर किया कि उन्हें कुर्सी न मिलने के कारण बात-बात पर गुस्सा आने लगा था और ये उनकी जिंदगी खराब कर रहा था।
कंपनी के ऐसे नीयम को बदलने के लिए नेथन ने कंपनी से दर्खास्त भी की। लेकिन ऐसा नहीं हो सका।
तो फिर उन्होंने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। लेकिन 2009 में इस कारण से नौकरी छोड़ने के बाद वो अपना केस तीन कोर्ट में ले गए जहां वो हारे। अब वो अपनी सुनवाई अपील कोर्ट में जारी रखेंगे।
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