क्रिकेट के मैदान चौकों छक्कों पर ठुमके लगाती चीयर्स लीडर को आपने देखा ही होगा। आपको जानकर अचंभा होगा कि पहले खिलाड़ियों की सफलता पर लड़कियां नहीं बल्कि मर्द ठुमके लगाते थे।
जी हां, 1940 से पहले फुटबाल के मैदान पर इंटरटेनमेंट और उत्साहवर्धन का काम महिलाओँ की बजाय पुरुष करते थे। पुरुष मैदान के एक तरफ खड़े होकर अपनी टीम के प्रदर्शन पर उछलते कूदते थे और जनता का मनोरंजन किया करते थे।
वर्ष 1880 में प्रिंसटन यूनिवर्सिटी में फुटबाल गेम वे दौरान चीयर लीडिंग गठन हुआ था और अब अमेरिका में चीयरलीडर्स और डांस टीम सदस्यों की संख्या लाखों वे पार पहुंच चकी है।
हालांकि 1940 के बाद धीरे-धीरे पुरुष चीयरलीडर्स की संख्या न के बराबर हो गई। हालांकि आज भी कई देशों में मर्द चीयरलीडिंग की भूमिका में होते हैं लेकिन इनकी संख्या कम है।
चीयरलीडिंग चलन दरअसल 1880 वे दशक में अमेरिका से हुआ था। अमेरिका वे बाद धीरे-धीरे यह पूरी दुनिया में ही फैलता चला गया। आज भी चीयरलीडिंग विदेशों में इतना लोकप्रिय है वि बाकायदा इसके लिए विश्व चैंपियनशिप आयोजित की जाती है।
विश्व चैंपियनशिपों में चीयरलीडर्स को भी अपने हुनर का नियमों वे अनुसार प्रदर्शन करना होता है। अमेरिका में इसके लिए एक संस्था है ‘यूनिवर्सल चीयर लीडिंग एसोसिएशन’।
अमेरिका में इस खेल को और बढ़ावा देने वे लिए बाकायदा कोच होते हैं जो चीयरलीडर्स तैयार करते हैं तथा इसके लिए प्रशिक्षण शिविर भी आयोजित किए जाते हैं।
अमेरिका में हाल ही में इस एसोसिएशन ने अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) को पत्र लिखकर चीयरलीडिंग को भी ओलंपिक में शामिल करने की अपील की है। अमेरिका के हाईस्कूल से लेकर यूनिवर्सिटी तक चीयरलीडिंग का क्रेज इतना ज्यादा है कि मैडोना, केटी, कैमरून डियाज, हैले बेरी जैसी कई हालीवुड सेलिब्रिटी हाईस्कूल में चीयरलीडर की भूमिका निभा चुकी हैं।