जिस इंसान पर उसने भरोसा किया कि वह उसे इंसाफ दिलाएगा, उसी दरिंदे ने उसे अपनी हवस का शिकार बना डाला। बलात्कार की शिकार युवती को इंसाफ दिलाने के बजाए उससे दुष्कर्म करने वाले वकील को एडीजे की अदालत ने दस साल कैद की सजा सुनाई है। दोषी वकील को दस हजार रुपये जुर्माना भी देना होगा।
शासकीय अधिवक्ता नीरज गुप्ता ने बताया मुजफ्फरनगर निवासी युवती हरिद्वार में किराये के मकान में रहकर सिडकुल में नौकरी करती थी। वर्ष 2004 में उसके गांव का जोगेंद्र और उसकी पत्नी रीना उसे काम दिलाने के बहाने दिल्ली ले गए। आरोप है कि जोगेंद्र और उसके साथी जयवीर ने दिल्ली में उसके साथ बलात्कार किया। इसकी शिकायत थाना द्वारिका दिल्ली में दर्ज कराई गई थी।
मुकदमे की पैरवी के लिए युवती ने मुजफ्फरनगर का वकील किया। आरोप है कि वकील सतेंद्र पाल सिंह बालियान ने युवती की मजबूरी का फायदा उठाकर आठ महीने तक उसे अपनी हवस का शिकार बनाता रहा। हरिद्वार आने के बाद भी वकील युवती का यौन शोषण करता रहा। मना करने पर युवती को जान से मारने की धमकी दी गई। वर्ष 2006 में युवती ने हरिद्वार एसएसपी से शिकायत कर न्याय की गुहार लगाई।
एसएसपी के निर्देश पर ज्वालापुर पुलिस ने आरोपी वकील के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। अभियोजन पक्ष ने चार गवाहों को अदालत में पेश किया। शुक्रवार को चतुर्थ अपर जिला जज गुरुबख्श सिंह ने आरोपी वकील को दोषी पाते हुए दस साल कैद की सजा सुनाई। साथ ही दस हजार का जुर्माना भी ठोका।