किसी युवती का अपहरण करना और उसके साथ जोर जबरदस्ती करना किसी भी देश में अपराध है, लेकिन किर्गिस्तान में ऐसा आम है। यह सब कुछ इसलिए किया जाता है ताकि उस युवती को शादी करने के लिए मजबूर किया जा सके। सूत्रों के मुताबिक किर्गिस्तान में हर साल करीब आठ हजार युवतियों का अपहरण शादी के लिए किया जाता है।
काफी समय से चली आ रही इस रवायत के खिलाफ काफी लोग हैं। लेकिन इसे समर्थन देने वालों की भी कमी नहीं है। सरकार इसे को गंभीर अपराध की श्रेणी में लाने का विचार कर रही है लेकिन उसके लिए इस सूरत में भी मुश्किलें बढ़ जाती है। यदि सरकार के फैसले के बाद युवतियों को बलात्कार करने वाले पुरुष के साथ नहीं रहने दिया जाता, तो कोई अन्य पुरुष ऐसी युवतियों के साथ शादी नहीं करता है।
यहां स्थित महिला सहायता केंद्र (डब्ल्यूएससी) के मुताबिक शादी के लिए सालाना बारह हजार युवतियों का अपहरण होता है। इनमें ज्यादातर मामले गरीब परिवारों और ग्रामीण इलाकों से होती हैं। डब्ल्यूएससी शादी के लिए युवतियों के अपहरण के खिलाफ अभियान चला रहे नेटवर्क का हिस्सा है।
‘कैंपेन 155’
बीते एक साल के दौरान इस परंपरा के खिलाफ में विभिन्न महिला संगठन से जुड़े कार्यकर्ताओं ने ‘कैंपेन 155’ नाम से अभियान चलाया हुआ है। अगर शादी के अपहरण पर अंकुश लगाने वाला कानून लागू हो जाता है तो वह देश के कानून में आपराधिक धारा 155 होगी, यही वजह है कि इस अभियान को ‘कैंपेन 155’ कहा जा रहा है।
कोलपोन मेतेवेवा की कहानी
कोलपोन मेतेवेवा का अपहरण शादी के लिए हुआ। कोलपोन का पति उनके साथ काफी मारपीट करने वाला निकला। एक दशक तक किसी तरह पति के साथ गुजर बसर करने के बाद कोलपोन ने अपने पति से तलाक मांगा। इस पर पति ने कोलपोन की हत्या कर दी। पत्नी की हत्या के मामले में अब पति 19 साल के कैद की सजा काट रहा है। कोलपोन का अपहरण 19 साल की उम्र में हुआ था, तब वे अपने पति के बारे में कुछ भी नहीं जानती थीं। वे अपहरण करने वाले शख्स से शादी नहीं करना चाहती थीं, लेकिन दूसरी तमाम लड़कियों की तरह ही और शर्म के चलते उसे अपनी पति के साथ रहना पड़ा।
क्या कहता है मौजूदा कानून
किर्गिस्तान में ये स्थिति तब है जब देश में इस पर अंकुश लगाने वाला एक कानून मौजूद है। मौजूदा कानून के मुताबिक अगर कोई शख्स किसी युवती की इच्छा के बिना शादी के लिए उसका अपहरण करता है तो उस पर जुर्माने के साथ साथ अधिकतम तीन साल की सजा का प्रावधान है। नए प्रस्तावित विधेयक में सजा को सात साल तक बढ़ाने का प्रावधान है, हालांकि पहले इसे दस साल तक बढ़ाने का प्रावधान रखा गया था।