शादी सात जन्मों का पवित्र रिश्ता है। एक तरफ जहां लड़कियों शादी के लिए सुंदर, जवान और कमाऊं जीवनसाथी के सपने देखते हैं तो दूसरी तरफ कम उम्र लड़कियों की शादी कुत्ते से कराने की अजीबोगरीब परंपरा चल रही है।
एक नासमझ बच्ची की शादी किसी जानवर से करा दी जाए तो आप इसे परंपरा नहीं बल्कि पाखंड का नाम देंगे लेकिन यह परंपरा झारखंड राज्य के हिस्सों में बदस्तूर जारी है।
10 साल से कम उम्र की बच्चियों की शादी कुत्ते से कराए जाने का कारण ग्रह शांति बताया जाता है। यह परंपरा यहां सदियों से चली आ रही है इसके अनुसार जब किसी लड़की का पहला दांत ऊपरी मसूड़े में हो तो उसे शुभ नहीं माना जाता है।
माना जाता है कि ऐसा गृहों के अशुभ प्रभाव के कारण होता है इसीलिए लड़की का दूसरा दांत आने से पहले उसका सांकेतिक विवाह किसी स्थानीय कुत्ते से करवा दिया जाता है। इस दौरान लड़की को दुल्हन की तरह सजाया जाता है और कुत्ते के साथ विवाह कराया जाता है। ऐसा माना जाता है कि कुत्ता यम का प्रतीक है और अपनी पत्नी के सभी अशुभ ग्रहों को अपने ऊपर ले लेता है। इससे लड़की के संकट खत्म हो जाते हैं।
अगर बालिका के मुंह में अतिरिक्त दांत उग आएं तो भी उसकी शादी कुत्ते से करा दी जाती है। इस क्षेत्र की इस परंपरा को कोई कुछ भी माने लेकिन सैकड़ों वर्षों से आजतक लोग इस परंपरा को मानते आ रहे हैं। बच्ची छोटी होती है और नासमझ भी। इसीलिए वो विरोध नहीं करती। हालांकि बाद में लड़की के बड़े होने पर उसका सामान्य व्यक्ति से विवाह करा दिया जाता है।