टाइटेनिक के निर्देशक जेम्स कैमरून अगर चाहते तो अपने अपने हीरो 'जैक' को बचा सकते थे। लेकिन जाने क्या सोचकर उन्होंने ऐसा नहीं किया। बात हो रही है टाइटेनिक हादसे पर बनी ब्लॉकबस्टर फिल्म 'टाइटेनिक' के दुखद क्लाइमेक्स की, जिसमें हीरो जैक अपनी प्रेमिका की खातिर पानी में तैरती राफ्ट पर नहीं चढ़ता और बर्फ जैसे ठंडे पानी में अकड़ कर मर जाता है। लेकिन इतने सालों बाद डिस्कवरी चैनल की मिथबस्टर टीम ने रहस्योद्घाटन किया है कि उसी राफ्ट पर चढ़कर जैक की जान भी बच सकती थी। इसका मतलब ये हुआ कि कैमरून की सनक के चलते ही फिल्म का हीरो अपनी जान गंवा बैठा। अब ये हुआ कैसे, आइए जानते हैं।
दरअसल एक अमेरिकी टेलीविजन शो में इस बात की जांच के लिए एक सीरीज प्रसारित की जा रही है, जिसमें इस सवाल की पड़ताल की जा रही है। कुछ लोगों का कहना है कि बर्फ की चट्टान से टकराकर दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद तैरती राफ्ट पर खींचकर फिल्म की नायिका रोज़ (केट विंसलेट) जैक को बचा सकती थी। 1912 में टाइटेनिक जहाज के डूबने की घटना पर बनी मशहूर फिल्म टाइटेनिक पर डिसकवरी चैनल के मिथबस्टर्स कार्यक्रम में नए सिरे से कई अनसुलझे पहलुओं की पड़ताल की गई है।
हाइपोथर्मिया टेस्ट के आधार पर कहा जा रहा है कि जैक अगर राफ्ट पर चढ़ जाता, तो फ्रिजिंग कंडीशन से उसकी मौत शायद नहीं होती। फिल्म में दिखाया गया था कि अटलांटिक महासागर के बर्फीले पानी में काफी देर रहने के बाद जैक की मौत हो गई थी। 1997 की इस फिल्म को फिर से याद किया जा रहा है और कहा जा रहा है कि जैक की मौत हाइपोथर्मिया यानी शरीर का तापमान गिरने से नहीं होती, अगर वह उस फट्टे पर चढ़ जाता जिस पर रोज़ मौजूद थी।
फिल्म के निदेशक जेम्स कैमरून ने मिथबस्टर्स की टीम को बताया कि उन्हें लग रहा था कि लकड़ी के फट्टे से रोज़ और जैक दोनों को एक साथ सपोर्ट नहीं मिल सकता था। जबकि मिथबस्टर्स की टीम ने पाया कि अगर रोज़ अपनी लाइफ जैकेट को फट्टे के नीचे लगाती तो दोनों को सपोर्ट मिल सकता था और बर्फीले पानी से निकलने के बाद जैक की मौत होने से बच जाती।