फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

वो सोचता रहा और नाक से बह गया दिमाग

Wed, 08 May 2013 04:02 PM IST
इंटरनेट डेस्क/ नई दिल्ली
विज्ञापन
विज्ञापन
नाक बहने की समस्या से तो सभी दो चार हुए हैं। लेकिन क्या आपने सुना है कि नाक के रास्ते दिमाग बह जाए। एक महाशय के साथ कुछ ऐसा हुआ। वो सोचता रहा कि नाक बह रही है और नाक के रास्ते उसका दिमाग बहता रहा।
विज्ञापन


डेली मेल के अनुसार एरिजोना के जोए नागी नाम के शख्स की नाक पिछले 18 महीने से बह रही थी। हर व्यक्ति की तरह नागी ने भी इसे साधारण जुकाम की तरह लिया और दवा खाता रहा।

शुरू में यह तकलीफ हफ्ते में एक या दो ही बार होती थी लेकिन बाद में हालात ऐसे हो गए कि नागी को हर समय नाक पर रूमाल रखना पड़ता था।

एक बारगी नागी को लगा कि एरिजोना का वातावरण उसके अनुकूल नहीं और यह किसी तरह की एलर्जी है। धीरे धीरे हालात इतने खराब हो गए कि कई बार उसे शर्मिंदा भी होना पड़ा।
विज्ञापन


बकौल नागी, जैसे आंखों से आंसू गिरते हैं वैसे ही उसकी नाक लगातार बहे जा रही थी। एक दिन जब हालात बेकाबू हो गए तो नागी ने डॉक्टर के पास जाने का फैसला किया।

तमाम परीक्षण करने के बाद डॉक्टर ने जो बताया वह वाकई चौंकाने वाला था। दरअसल नागी की नाक से पानी या कुछ और नहीं बल्कि उनके दिमाग का तरल पदार्थ रिस-रिसकर बाहर आ रहा था।
विज्ञापन


नागी के दिमाग की झिल्ली में एक छेद था और यह तरल वहीं से रिस रहा था। ऑपरेशन कराने के बाद यह छेद भर पाया।

नागी की सर्जरी करने वाले डॉक्टर नाकाजी ने बताया कि जिस समय नागी आया, उसकी हालत बेहद खराब थी।

डॉक्टर बताते हैं कि दिमाग की झिल्ली अपने भीतर एक तरल पदार्थ भरे रहती है। इसी तरलता की वजह से दिमाग सूखता नहीं है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें