ये एक ऐसा विलेन है जो एक बार पीछे पड़ जाए तो जान लेकर छोड़ता है। अच्छे से अच्छे इसका मोह छोड़ नहीं पाते। जी हां हम बात कर रहे हैं नशीले खलनायक धूम्रपान की। पहले शौक, फिर आदत और फिर मजबूरी बना धू्म्रपान हर साल कई जानें लील लेता है।
पिछले 100 साल में उत्पादित 45 लाख करोड़ बीड़ी और सिगरेट से निकले धुएं के चलते 10 करोड़ भारतीयों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। करंट साइंस नामक मैगजीन में छपी एक स्टडी में यह नया खुलासा हुआ है। शोधकर्ता प्रणय जी लाल, नेविन सी विल्सन और प्रकाश सी गुप्ता ने इस स्टडी में कहा है, ‘हमारी गणना सबसे ज्यादा रूढ़िवादी अनुमान पर और वर्तमान मृत्युदर पर आधारित है, जो कि काफी महत्वपूर्ण और खतरनाक है।’ लाल और विल्सन टीबी और फेंफड़ों के खिलाफ काम कर रही अंतरराष्ट्रीय यूनियन के दक्षिण-पूर्व एशिया ऑफिस से जुड़े हुए हैं। जबकि गुप्ता नवी मुंबई स्थित हेलिस-सेकसरिया संस्थान के लिए काम कर रहे हैं।
स्टडी में कहा गया है कि तंबाकू के इस्तेमाल के चलते अब तक लगभग 10 करोड़ लोगों की मौत हो चुकी है जबकि अकेले बीड़ी पीने की वजह से 7 करोड़ 70 लाख जान जा चुकी हैं। शोधकर्ताओं ने कहा है कि देश में तंबाकू इंडस्ट्री की पालिसी की समीक्षा करने की बेहद जरूरत है। उन्होंने कहा कि धूम्रपान शुरू करने के बाद व्यक्ति को मरने तक तीन से चार दशक लग जाते हैं, इस कारण आने वाले समय में और भी ज्यादा मौतें देखने को मिलेंगी।
स्टडी में कहा गया है कि 1910 से 2010 के समय अंतराल में देश में अनुमानित 19 करोड़ लोग बीड़ी पीने वाले और 4 करोड़ 10 लाख सिगरेट पीने वाले थे। इनमें से एक चौथाई लोगों की मृत्यु धूम्रपान के चलते ही हुई। तंबाकू से जुड़ी विभिन्न इंडस्ट्री के 23 डाटा स्रोतों की समीक्षा करने के बाद यह शोधकर्ता इस नतीजे पर पहुंचे हैं।