खुदाई के दौरान गढ़े हुए सोने-चांदी और सजावट के सामान मिलना तो आम है, लेकिन यहां वैज्ञानिकों को मिला कुछ बेहद चौंका देने वाली चीज।
दरअसल, भू-वैज्ञानिकों को खुदाई के दौरान कुछ 14वीं सदी से मिलने का तो अंदाजा था। उन्हें लगा था कि हर बार की तरह सोना-चांदी, मूर्तियां या फिर घर के टूटे-फूटे हिस्से मिलेंगे, लेकिन उन्हें मिल गया इंसानी मल।
ये मल लकड़ी के बैरल में वो देखकर भौचक्के रह गए।
आ रही थी जोरदार बदबू
लगभग 700 साल पुराने लकड़ी के बैरल में पहले की मिली खुदाईयां ये बताती है कि उनमें उस जमाने में शराब और सोने-चांदी भरकर एक से दूसरे देश में भेजी जाती थी।
पुरानी शराब समझकार खोले गए लकड़ी के बैरलों में से जोरदार गंध ने वहां मौजूद वैज्ञानिकों को भौचक्का कर दिया।
वो इसलिए भी हैरान रह गए कि क्योंकि उन बैरलों में से जोरदार गंध आ रही थी जिसकर मतलब था कि वो अभी भी सड़ रहें हैं।
ये था पूरा एक टॉयलेट
गहरे खुदाई करने पर पता चला कि कि ये बैरल पूरे एक टॉयलेट की तरह गाढ़ी गई थी।
ऐसे कई बैरलों का एक सोचे-समझे अंदाज में सेट रहना ये बताता है कि उसका इस्तेमाल किसलिए होता है।
वैज्ञानिकों का ये भी कहना है कि 14वीं सदी में ये पूरा एक ऐसा टॉयलेट सिस्टम था जिसे एक जगह से दूसरी जगह पर ले जाया जा सकता था।
खुदाई डेनमार्क के एक पुराने शहर ओडेंस में हुई है। उस मल से अभी भी इंसानी मल के जोरदार बदबू आने की वजह के बारे में जानने में अभी वैज्ञानिक लगे हुए हैं।
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