बंबई हाईकोर्ट ने आठ साल पुराने पारिवारिक अदालत एक तलाक के आदेश को खारिज करते हुए कहा है कि पत्नी के पक्ष को भी सुना जाना चाहिए। पति ने दावा किया था कि 1991 में उसकी ऑस्ट्रेलियाई पत्नी उससे अलग हो गई थी।
अदालत ने कहा कि तलाक के आदेश का पक्षों की वैवाहिक स्थिति पर दूरगामी असर पड़ता है और इसलिए पत्नी को सुनवाई का पर्याप्त अवसर दिए जाने की आवश्यकता है।
इस मामले में पत्नी ने दावा किया था कि उसका पक्ष नहीं सुना गया। हाईकोर्ट की पीठ ने अपने आदेश में कहा कि यह भी ध्यान रखा जाना चाहिए कि कोई भी पक्ष जानबूझकर सुनवाई की कार्यवाही में विलंब नहीं करे या परिवार अदालत के समक्ष कार्यवाही में शामिल होने से जानबूझकर नहीं बचे।