उसकी टांगें मेंढक जैसी थी। लेकिन आज वो मेंढक की तरह फुदकने की बजाय इंसानों की तरह चल रही है। जी हां चार साल की खुशकिस्मत बच्ची डॉक्टरों की मेहरबानी से दुसाध्य बीमारी पर काबू पाकर अपने पैरों पर चल रही है।
ये करिश्मा लंदन की चार साल की लिलिया रीडिंग के साथ हुआ है। लिलिया के पैर जन्म के समय से ही मेंढक की तरह मुड़े हुए थे। समय से एक महीना पहले पैदा हुई लिलिया जन्मजात शारीरिक बनावट की बीमारी मस्क्यूलर मायोपैथी (मस्क्यूलर डिस्ट्रफी का एक टर्म) का शिकार थी।
डॉक्टरों ने लिलिया के माता पिता को बताया था कि लिलिया के दोनों पैरों में 15 -15 की बजाय मात्र दो-दो मांसपेशियां हैं और शायद वो जिंदगी में कभी चल नहीं पाएगी।
लेकिन उन्हीं डॉक्टरों की अथक मेहनत और 13 दुसाध्य आपरेशनो की बदौलत आज मेंढक जैसी टांगों वाली ये नन्ही लड़की अपने पैरों पर चल ही नहीं रही बल्कि खेल कूद भी रही है।
लिलिया का मां का कहना है कि ये करिश्मा सा लगता है जब वो अपनी बिटिया को अपने पैरों पर चलता हुए देखते हैं। जन्म के समय लिलिया के दोनों पैर घुटनों से जुड़े हुए थे और डॉक्टरोको डर था कि लिलिया दो मांसपेशियों की बदौलत कभी चल नहीं पाएगी।
लंदन के ग्रेट ऑरमांड स्ट्रीट हॉस्पिटल के विशेषज्ञों ने एक सर्जरी के जरिए लिलिया के घुटनों की मांसपेशियो को अलग किया। इसके बाद के ऑपरेशनों में लिलिया के पैरों में स्पिलिंट फिक्स किए गए जिससे लिलिया के पैरों को मजबूती मिल गई। स्पिलिंट दरअसल कृत्रिम ज्वाइंट होते हैं जिनसे शरीर के बेजान हिस्सों को ताकत मिलती है।
डॉक्टरों के मुताबिक लिलिया के कूल्हों से लेकर एड़ी तक स्पिलिंट फिट किए गए। इसके बाद शुरू हुई खड़ा होने और चलने की प्रेक्टिस। लिलिया ने अपनी मेहनत और दृढ़शक्ति की बदौलत कुछ ही हफ्तों में खड़ा होना सीख लिया।
क्या है मस्क्यूलर डिस्ट्रफी
मस्क्यूलर डिस्ट्रफी शारीरिक बनावट से जुड़ी जन्मजात और दुसाध्य बीमारी है। मस्क्युलर डिस्ट्रफी में मसल सेल्स और टिशू की डेथ के कारण मांसपेशियां खराब हो जाती हैं।