क्या आपको भी नौकरी और गर्लफ्रैंड न मिलने के सपने आते हैं। आप चाह कर भी सुखद सपने नहीं देख पाते। तो आपको सपनों का गणित समझने की जरूरत है। जी हां, सपनों का भी गणित होता है। उम्र के अनुसार व्यक्ति के सपने भी बदलने लगते हैं।
किस उम्र में कैसे सपने
जेएनयू के प्रो. बीएन मलिक ने एक संगोष्ठी के तहत स्वप्न विज्ञान के कुछ दिलचस्प तथ्य बताए। उन्होंने बताया कि 10 से 18 वर्ष तक के बालक और किशोरों को ज्यादातर दिनभर की घटनाओं के संबंध में सपने आते हैं। ये बच्चे स्कूल, गली मोहल्ले में घटी घटनाओं के सपने देखते हैं। वहीं 18 से 25 साल के युवकों को अपनी दिनचर्या से जुड़े सपने आते हैं। इन सपनों में प्रेम प्रसंग, झगड़ा और नौकरी से संबंधित प्रसंग दिखते हैं।
25 से 40 साल के लोगों को नई नई बातों और प्लान्स के सपने आते हैं। मसलन नया बिजनेस, डील, घर इत्यादि के ख्वाब उन्हें दिखते हैं। वहीं 40 से अधिक उम्र वालों को जीवन से जुड़े वे सपने आते हैं जिन्हें उनका ब्रेन याद करता है। प्रोफेसल मलिक कहते हैं कि जो बच्चा बचपन में खुशनुमा सपने देखता है वहीं उसका आधार बनता है। सपनों से यह भी जानकारी मिलती है कि जीवन कैसा होगा।
बीमार के सपने
बीमार व्यक्ति को सपने कम आते हैं, क्योंकि उसके मस्तिष्क में न्यूरो बायोलाजिकल डिसआर्डर उत्पन्न हो जाता है। इससे उसके ब्रेन का वह हिस्सा प्रभावित हो जाता है, जहां से सपने बनते हैं। दूसरी ओर स्वस्थ व्यक्ति के जीवन में घटित सालों पुरानी घटनाओं को भी मस्तिष्क सपने के रूप में रीप्ले करने लगता है।
क्या है सपनों का रहस्य
ब्रेन में कुछ सुप्त कोशिकाएं रहती हैं। जब व्यक्ति सोता है तो उसका ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है। इससे ब्रेन में रक्त का संचार तेज हो जाता है। इस समय ब्रेन की सफाई होती है जिसे आरईएम स्लीप कहते हैं। रक्त का संचार बढ़ने से सुप्त कोशिकाएं जागृत हो जाती हैं और सपने आने लगते हैं।