हर आदमी मंदिर में दान देकर अपनी गृहस्थी के लिए समृद्धि और सुख शांति मांगता है। लेकिन एक व्यक्ति ने अपनी बीवी और बच्चे को खर्चा देने की बजाय मंदिर में लाखों का दान करना मुनासिब समझा।
दिल्ली के कारोबारी प्रिंस ने पिछले दिनों एक मंदिर को एक लाख 11 हजार रुपये का दान तो दे दिया लेकिन जब पत्नी ने अपने व बच्चे के लिए गुजारा भत्ता मांगा तो उसने इससे इंकार कर दिया।
यही नहीं बीवी बच्चों को गुजारा भत्ता देने से बचने के लिए इस कारोबारी ने अदालत से झूठ बोला कि वो बतौर हैल्पर पांच हजार रुपया कमाता है। अदालत में झूठ पकड़ा जाने पर प्रिंस को बीवी बच्चो को गुजारा भत्ता देने के निर्देश दिए गए हैं।
मामला कृष्णा नगर निवासी नेहा जैन के केस से जुड़ा है। नेहा ने अदालत में अर्जी दायर कर कारोबारी पति प्रिंस से गुजारा भत्ता दिलाने की मांग की थी, जिस पर मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट वंदना जैन ने यह फैसला सुनाया।
सुनवाई के दौरान अदालत में एक मंदिर का फोटो भी पेश किया गया, जिसमें प्रिंस जैन को एक लाख 11 हजार रुपए का दान देते हुए दिखाया गया।
नेहा के अधिवक्ता पीयूष जैन ने कहा कि पीड़िता का पति प्रिंस गौतमपुरी में रहता है और वे कढ़ाई की फैक्टरी में पार्टनर हैं।
याचिका के जवाब में प्रिंस जैन ने कोर्ट में कहा था कि वह इस समय एक कंपनी में बतौर हेल्पर पांच से छह हजार रुपये की नौकरी कर रहा है। उसकी पत्नी पढ़ी-लिखी है और ट्यूशन पढ़ा कर गुजारा कर सकती है।
लेकिन अदालत में प्रिंस का झूठ तब पकड़ा गया जब वो मंदिर को दान देते समय वाली तस्वीर में दिखा।