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गंदी नजर से बचाने के लिए गर्म पत्थर से रगड़े जाते हैं कुंवारियों के अंग

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डौआला की एक धूल भरी सड़क किनारे बने एक घर में 28 साल की जूली एनजेसा अपनी माँ, पिता और चचेरे भाई बहनों के साथ रहती हैं। हर शुक्रवार को दोपहर के वक्त जूली के पड़ोस में किशोर उम्र की लड़कियों का जमघट लगता है।
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महज 7 हजार रुपए के लिए इस औरत ने किया कुछ ऐसा कि...

लड़कियों की इस मुलाकात में थोड़ा बहुत शोर शराबा, चहल-पहल और हफ्ते भर की शरारतों का जिक्र लाजिम रहता है और इसके बाद जूली काम के मुद्दे पर आती हैं। वे अपने समुदाय की इन किशोर लड़कियों को उन खतरों के बारे में आगाह करती हैं जिनसे उन्हें व्यस्क होने के साथ पेश होना पड़ सकता है।

वक्ष स्‍थल को सपाट करने पर देती हैं जोर

पिछले कुछ सालों से जूली जिन मुद्दों पर इन लड़कियों के साथ बात कर रही हैं, उनमें 'ब्रेस्ट आयरनिंग' या वक्ष स्थल को किसी गर्म चीज से दागने का रिवाज भी एक है।

कैमरून में कुछ माताएँ अपनी कमसिन बेटियों के विकसित होते वक्ष स्थल को सपाट करने के लिए उसे ग़र्म पत्थर से दाग दिया करती हैं।

कुत्ता बन गया भूत और फिर कुछ ऐसा हुआ कि..

उनका इरादा अपनी बेटियों को पुरुषों की नजर में कम आकर्षक बनाने का होता है ताकि वे अपनी लड़कियों को कम उम्र में माँ बनने से बचा सकें। 'ब्रेस्ट आयरनिंग' एक बेहद ही तकलीफ़ देने वाली प्रक्रिया होती है जिसका किसी लड़की के स्वास्थ्य पर लंबे समय तक असर रहता है।

जूली के साथ भी हुआ है ऐसा

वक्ष स्थल को किसी ग़र्म चीज़ से दागने के चलन के बारे में सलीके से बात करने के लिए जूली की तुलना में बहुत कम लोग ऐसे हैं जिन्हें काबिल कहा जा सकता है।

जूली की माँ जीनेवी ने अपनी बेटी के वक्ष स्थल को एक गर्म पत्थर से दाग दिया था। तब जूली 16 बरस की थीं। वह कहती हैं कि उन्हें अपनी माँ से कोई शिकायत नहीं है क्योंकि उसने जो कुछ भी किया मुझे मर्दों की बुरी नजर से बचाने के लिए किया क्योंकि मैं अब औरत बन गई थी।

महिलाओं ने खोल रखा है मोर्चा

जूली और उनकी तरह 'ब्रेस्ट आयरनिंग' से प्रभावित की कई महिलाओं ने बीते एक दशक से इस रिवाज के ख़िलाफ़ एकजुट होकर मोर्चा खोला हुआ है।

वे देश भर में लोगों को इस बारे में जागरूक करने की कोशिश कर रही हैं। उनकी कोशिशों को अंतरराष्ट्रीय संस्था जर्मन डेवलपमेंट एजेंसी 'जीआईजेड' का समर्थन मिला हुआ है।

जानना नहीं चाहेंगे क्‍या कर रही है ये खूबसूरत लड़की

जीआईजेड कैमरून में 'ब्रेस्ट आयरनिंग' को लेकर जागरूकता अभियान चला रहा है। इसके नतीजे भी सामने आ रहे हैं। कैमरून में एक सरकारी सर्वे में यह स्वीकार किया गया है कि पिछले दस सालों में 'ब्रेस्ट आयरनिंग' के मामले 50 फीसदी तक कम हुए हैं।

मानवाधिकार कार्यकर्ता

जूली जिस मुकाम पर हैं, उसके लिए वे अपनी तरह की अन्य मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का शुक्रिया अता करती हैं। आज की लड़कियों को उन हालात का सामना उस तरह से नहीं करना पड़ता है जैसा कि जूली को करना पड़ा था।

लेकिन कैमरून में गुरबत की जिंदगी जीने को मजबूर लड़कियों के सामने कई चुनौतियाँ हैं। उन्हें बलात्कार, कच्ची उम्र के गर्भ और सगे संबंधियों के व्याभिचार का सामना करना पड़ रहा है। ये मुश्किलें उनके सामने मर्द खड़ी कर रहे हैं और इन लड़कियों के सामने विकल्प भी बहुत कम हैं कि वे इनका सामना कर पाएँ।
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उनकी बहन भी है गर्भवती

इस बीच जूली को एक बुरी खबर मिली। उनकी चचेरी बहन, जिसकी उम्र 16 साल है, गर्भवती है। वह ठगा हुआ महसूस कर रही थी। लड़कियों के साथ सामूहिक बातचीत के दौरान अभी दो दिन पहले ही उन्होंने सबसे अपील की थी कि अपनी मुश्किलों के बारे में वे खुल कर बात करें।

अब जूली इस बात को लेकर पेशोपेश में हैं कि वे अपनी बहन को क्या सलाह दें। कैमरून में गर्भपात अवैध है और ये ख़तरनाक हो सकता है। अगर उसके रूढ़िवादी कैथोलिक अभिभावकों को ये पता चलेगा कि गर्भपात की सलाह जूली ने ही दी थी तो वे उन्हें घर से बाहर निकाल देंगे।
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