पश्चिम बंगाल की बबली रेड लाइट एरिया (मीरगंज) में कोठे पर बिकने से बच गई। उसे लेकर दलाल मीरगंज तक पहुंचा था लेकिन कोठे पर जाते वक्त चौदह साल की बबली हाथ छुड़ाकर भाग निकली। बालिका भागते हुए पुलिस तक पहुंची और सारी कहानी बया कर दी। पुलिस दलाल को तलाशती रही लेकिन वह नहीं मिला। बालिका को महिला थाने में रखा गया है। मजिस्ट्रेट के सामने पेशी के बाद बालिका को घर भेजा जाएगा।
पश्चिम बंगाल के सियालदाह जिले के रहने वाले मुस्तकीम की बेटी बबली (14) (दोनों परिवर्तित नाम) छह बहनों और चार भाइयों में तीसरे नंबर पर है। गरीबी से जूझते परिवार ने बबली को भी एक घर में झाड़ू पोछे के लिए लगा दिया। इसी दौरान बबली को एक महिला मिली। उसने अधिक रुपये देने के लालच में बबली को झांसे में फंसा लिया और एक शख्स के हाथ बेच डाला। बेचे जाने तक भी बबली को अंदाज नहीं हुआ कि उसके साथ धोखा हो रहा है। वो समझ रही थी कि घर के कामकाज के लिए उसे किसी के साथ भेजा जा रहा है।
इस शख्स ने बबली को कोठे पर बेचने से पहले होटल के कमरे में रखा। यह होटल स्टेशन के पास ही है और दलाल चाहता था कि बबली को सजा संवार कर कोठे पर ले जाए। इसके लिए कमरे में उसने बबली के कपड़े बदलवाए, उसे लिपिस्टक-पाउडर लगवाया। सजाने-संवारने के बाद वह उसे लेकर मीरगंज पहुंचा था। इन्हीं हरकतों से बबली को शक होने लगा था।
मीरगंज में किसी से फोन पर बात करने के बाद बबली को एक कोठे पर ले जाने लगा। बबली वहां सजी धजी लड़कियों को देखकर समझ गई कि उसे गलत धंधे में धकेला जा रहा है। बबली चीखने लगी और अपना हाथ छुड़ाकर गली से बाहर भागी। कुछ दूर वह शख्स बबली के पीछे भागा फिर भीड़ देख गली में घुस गया। बबली भागती हुई घंटाघर स्थित एक दुकान में घुस गई। दुकानदारों ने कोतवाली पुलिस को बुला लिया। बबली सिर्फ बंगाली भाषा बोल रही थी। इस कारण किसी को कुछ समझ में नहीं आ रहा था। महिला अधिकार अभियान की मंजू पाठक मौके पर पहुंचीं तो उन्होंने बंगाली जानने वाली अपनी एक सहेली को बुलाया। उनके आने के बाद स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो पाई। फिलहाल उसे महिला थाने में रखा गया है।