करत करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान...ये कहावत उन लोगों के लिए बनी है जो प्रयास करके कुछ हासिल करते हैं। फिर चाहे वो भले ही संगीत की उपलब्धि ही क्यों न हो। असम के 15 हजार संगीत प्रेमियों ने ‘खोल’ वाद्ययंत्र की सामूहिक गूंज से विश्व रिकार्ड बनाया है। वैसे खोल को सुनना अपने आप में एक अद्भुत अनुभव है लेकिन जब 15 हजार खोल एक साथ ताल से ताल मिलाकर बज रहे हों तो नजारा कुछ और ही हो जाता है।
गुवाहाटी से 300 किलोमीटर दूर असम के जोरहट जिले में 14, 833 तालवादक इकट्ठा हुए। उन्होंने लगातार 15 मिनट तक एक साथ एक स्वर में इस वाद्ययंत्र को बजाकर इंडियन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करा लिया। इन 15 हजार लोगों ने मिलकर असम राज्य के गीत ‘ओ मुर अपुनर देश’ को भी एक मिनट पांच सेकेंड तक गाया। ये नजारा देखने के लिए दूर-दूर से काफी संख्या में लोग इकट्ठा हुए।
सिर पर एक खास तरह की टोपी और सफेद रंग के परिधानों में खोल की थाप पर थिरकने वाले लोगों में हर आयु वर्ग के लोग शामिल नजर आए। इस आयोजन का एक वीडियो आधिकारिक रूप से गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड को भी भेजा गया है।
उम्मीद की जा रही है कि इस प्रयास के जरिए दुनिया के नक्शे में असम की एक खास पहचान बन पाएगी। वाद्ययंत्र बजाने के सबसे बड़े आयोजन का रिकॉर्ड जुलाई, 2002 में हांगकांग में बनाया गया था। इस आयोजन के दौरान 10,102 लोगों ने एक साथ एक ही समय में इकट्ठा होकर छह मिनट तक वाद्ययंत्र बजाया था।
ड्रम और तबले जैसा खोल
उत्तरी और पूर्वी भारत में टेराकोटा से बने दो साइड वाले ड्रम को खोल कहा जाता है। खोल को मृदंग के नाम से भी जाना जाता है। इसका इस्तेमाल सबसे पहले पश्चिम बंगाल, असम और मणिपुर में किया गया। इसे दोनों हाथों की अंगुलियों और हथेली से बजाया जाता है। इसकी एक साइड दूसरी साइड से आकार में छोटी होती है। ऐसा माना जाता है कि असम के संत शंकरदेव इस वाद्ययंत्र का इस्तेमाल करते थे। भारत में लोकसंगीत, धर्म-भक्ति, कीर्तन जैसे मौकों पर आज भी खोल बजाया जाता है। खोल को बजाने के लिए 108 अलग-अलग तरह की ताल इस्तेमाल की जा सकती हैं।