कल्पना कीजिए आप जिसका अंतिम संस्कार कर चुके हों वो एक दिन साक्षात आपके सामने आ जाए। ऐसा ही कुछ उस परिवार के साथ हुआ जो 25 साल पहले अपनी बिटिया की लाश को नदी में बहा चुका था।
जिस लड़की को मरा हुआ समझकर घरवालों ने नदी में बहा दिया था वही बेटी 25 साल बाद एक दिन अचानक उनके सामने आ खड़ी हुई। चार साल की वो नन्हीं बच्ची आज 30 साल की हो चुकी है। शादीशुदा है और पांच बच्चों की मां भी।
सुनने में भले ये आपको किसी फिल्म की कहानी लगे लेकिन ये सच्चाई। जौनपुर के कौली गांव में उस दिन जश्न का माहौल था और हो भी क्यों न...उनकी मरी हुई बेटी जो लौट आई थी। कौली गांव के जय प्रकाश की बेटी इंदू को जुलाई 1988 में एक जहरीले सांप ने काट लिया था। इंदू उस समय चार वर्ष की थी। परिवार ने हर संभव कोशिश की उसे बचाने की लेकिन डॉक्टरों ने उसे जवाब दे दिया।
बच्ची को मरा समझ घर वालों ने उसे सई नदी में प्रवाहित कर दिया। शरीर बहते-बहते रामदयालगंज के पास पहुंच गया। सौभाग्य से ऊंचीकला गांव के शिवनाथ यादव और मेवा लाल ने इंदू को देख लिया और अपने साथ घर ले गए। आसपास के गांवों में हल्ला मचा तो इनरिया गांव के नि:संतान दंपती गोवर्धन पहुंचे और बच्ची को गोद लेने की इच्छा जताई।
शिवनाथ ने बच्ची को गोवर्धन गौतम को सौंप दिया। गोवर्धन ने उसका नाम पुष्पा रख दिया। समय के साथ पुष्पा बड़ी हुई तो गोवर्धन ने उसका विवाह जलालपुर के सेहमलपुर गांव के दिलीप के साथ कर दिया। अब पुष्पा को तीन बेटे और दो बेटी हैं। एक दिन गोवर्धन तेजी बाजार स्थित अपने एक रिश्तेदार के यहां गया, जहां बच्ची के पहले पिता भी पहुंचे हुए थे।
बातों-बातों में उन्हें सई नदी का सारा किस्सा पता चला। जय प्रकाश ने घर पहुंचकर सारी बात अपनी पत्नी को बताई, इसके बाद दोनों इनरिया गांव पहुंचे। माथे पर चोट के निशान, शरीर के लक्षण के आधार पर उन्हें यकीन हो गया कि गोवर्धन की पत्नी पुष्पा ही उनकी इन्दु है। गोवर्धन ने भी कोई आपत्ति नहीं की।
हालांकि पुष्पा को घर के बगल में लगे पंपिंग सेट के अलावा कुछ भी याद नहीं है लेकिन वो दोनों ही परिवारों को अपना माता-पिता मानने को तैयार है। सिर्फ अपने ही गांव में नहीं इंदु को देखने के लिए दूर-दराज के लोग भी जमा हो रहे हैं।
(फोटो में बीच में बैठी महिला इंदु है।)