पंचायतों द्वारा तुगलकी फरमान जारी करना तो आम बात है लेकिन किसी पंचायत द्वारा एक ही मामले में किसी आरोपी को दो बार बेगुनाही साबित करने का फरमान सुनाना नई बात है। झज्जर जिले के गांव में पंचायत ने छह साल पहले एक युवक को हत्या के आरोप में सौ जलते हुए उपलों में से गरम लोहे की रॉड नंगे हाथों से उठाने का फरमान सुनाया था।
तब युवक ने पंचायत के फरमान को माना भी और आग से हुए जख्मों के कारण कई दिन तक अस्वस्थ भी रहा। अब छह वर्ष बात उसी युवक को फिर से अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए उक्त अग्नि परीक्षा देने के लिए मजबूर किया जा रहा है। पंचायत के इस रुख से आहत युवक ने अब एसपी से गुहार लगाई है कि उसे पंचायत के फरमान से बचाया जाए।
झज्जर के गांव खेतावास के लीलूनाथ पुत्र रूपचंद ने एसपी को दी शिकायत में कहा है कि वर्ष 2002 में गांव खेतावास के सपेरे जगदीश नाथ की मौत हो गई थी। लीलू नाथ का कहना है कि जगदीश की मौत का आरोप उस पर लगाया गया, जबकि उसका इस मामले में लेना-देना नहीं था। लीलू नाथ का कहना है कि सपेरों की पंचायत ने सजा के तौर पर उसे सौ जलते हुए उपलों में से गरम लोहे की रॉड उठाने का फरमान सुनाया। इसके साथ ही, सवा लाख रुपये पंचायत में पहले जमा करवाने का आदेश भी दिया। यह पैसा उसकी बेगुनाही के सबूत के तौर पर जमा किया गया।
लीलूनाथ के अनुसार, उसके बार-बार मना करने के बावजूद उसे पंचायत के फरमान के आगे झुकना पड़ा और न चाहते हुए भी नंगे हाथों से लोहे की रॉड उठाकर ‘अगिभन परीक्षा’ देनी पड़ी। लीलूनाथ ने बताया कि इस ‘अगिभन परीक्षा’ की वजह से वह बुरी तरह जल गया और उसे काफी गहरे जख्म हो गए।
अब एसपी को दी शिकायत में लीलूनाथ ने कहा है कि पंचायत के दबंग लोगों ने एक बार फिर इस मामले को उठाते हुए उस पर पुरानी सजा लागू करने का फरमान सुनाया है, जिसमें पंचायत द्वारा उसे मजबूर किया जा रहा है कि वह दशहरे के अगले पांच दिन बाद फरीदाबाद के गांव खानपुर जाए और फिर से अपनी बेगुनाही का सबूत ठीक उसी प्रकार दे जैसा सबूत उसने छह वर्ष पूर्व दिया था।