कहते हैं कि इंसान अगर ठान ले कायनात भी साथ आ जाती है। ऐसा ही कुछ छत्तीसगढ़ के रायपुर में 61 साल की महिला के साथ हुआ। हार्ट पेशेंट इस महिला ने 10 किलोमीटर की मैराथन में मैडल जीता है। ऐसे में जब हार्ट पेशेंट एक किलोमीटर चलने में कतराते हैं, 61 साल की सुमन ने 10 किलोमीटर की मैराथन में मैडल जीतकर अपने जज्बे की मिसाल पेश की है।
रायपुर जिले में स्थित बैकुंठ निवासी 61 वर्षीय सुमन शर्मा ह्दय रोगी हैं। डॉक्टरों ने भी सुमन को इस उम्र में आराम करने की सलाह दी थी लेकिन सुमन शर्मा ने न केवल मैराथन की 10 किलोमीटर दौड़ प्रतियोगिता में भाग लिया बल्कि मैडल भी जीता। कमाल की बात है कि ह्दय रोग भी सुमन की कोशिश में बाधा न बन पाया। इस उम्र में वह न केवल दौड़ीं बल्कि मेडल भी हासिल किया।
सुमन ने 10 किलोमीटर की दौड़ 1 घंटा 39 मिनट 54 सेकंड में पूरी कर मेडल एवं प्रशस्ति.पत्र प्राप्त किया। 55 वर्ष या इससे अधिक उम्र की भारतीय स्पर्धा में सुमन ने पहला स्थान प्राप्त किया। साथ ही 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र की महिला धावकों में 13वां स्थान प्राप्त किया। सुमन को मई 2010 में दिल्ली के एस्कार्ट्स हास्पिटल में ह्दय की धमनी में 99 प्रतिशत रुकावट के कारण स्टेंट लगाया गया था।
इसके बाद उन्होंने 1 जून 2010 से पांच मिनट टहलना शुरू किया। यह सफर 25 जनवरी 2013 को 10 किलोमीटर तक पहुंच गया। सुमन कहती हैं कि मैराथन दौड़ में भाग लेने की प्रेरणा उन्हें अपने बेटे रजत से मिली। रजत प्राइस वाटर हाउस कूपर कंपनी में उच्च पद पर दुबई में कार्यरत हैं। सुमन के पति राकेश शर्मा एक्जीक्यूटिव एडवाइजर पर्सनल एंड एडमिनिस्ट्रेशन सेंचुरी सीमेंट बैकुंठ में पदस्थ हैं।
सुमन का कहना है कि टहलने की आदत और सकारात्मक सोच ने मुझे जीवंत प्रसन्न और उत्साह से भर दिया है। मैं अपने को बीमार और वृद्ध नहीं बल्कि प्रसन्न स्वस्थ और युवा महसूस करती हूं। अगर आप दृढ़ संकल्पित हैं और परिवार साथ है तो आप ऐसा प्रयास किसी भी उम्र में कर सकते हैं।