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क्या आप इन 5 बातों के बारे में जानते हैं, जो मौत के बाद होती हैं...?

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आपको ये सुनकर आश्चर्य होगा लेकिन सच्चाई यही है कि मौत के बाद प्रकृति और क्रूर हो जाती है। प्रकृति खुद-ब-खुद मानव शरीर को खाना शुरू कर देती है।
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आज मृत शरीर को नष्ट करने के लिए कई तरह के संसाधन हैं लेकिन जब ये कुछ नहीं था, तब भी प्रकृति अपना काम किया करती थी। पर क्या आप जानते हैं प्राकृतिक रूप से शरीर कैसे नष्ट होता था?

कोशिकाएं फट के खुल जाती हैं

इंसान की मौत के कुछ मिनटों बाद ही शरीर गलना शुरू हो जाता है। जब दिल धड़कना बंद कर देता है तो शरीर का तापमान प्रति घंटा 1.5 फॉरेनहाइट की दर से गिरता चला जाता है। ये प्रक्रिया तब तक चलती है जब तक कि शरीर का तापमान कमरे के तापमान के बराबर नहीं हो जाता।

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एमएनएन के अनुसार, मौत के बाद खून और ज्यादा अम्लीय होता जाता है। जिसकी वजह से शरीर की कोशिकाएं फट जाती हैं और वो खुद को ही खाना शुरू कर देती हैं।

शरीर हो जाता है सफेद या फिर बैंगनी

आप जानते हैं कि मरने के बाद इंसान का शरीर सफेद या बैंगनी हो जाता है।

मरने के बाद पहला प्रभाव गुरुत्वाकर्षण का होता है। एक ओर जहां मरने के बाद शरीर का बाकी हिस्सा सफेद हो जाता है वहीं लाल रुधिर कोशिकाएं उस ओर चली जाती हैं जो हिस्सा जमीन के सबसे करीब होता है। जिसकी वजह से शरीर के निचले हिस्से पर बैंगनी निशान हो जाते हैं। ‌जिन्हें livor mortis के नाम से जाना जाता है।

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ऐसा माना जाता है कि ये निशान मरने का सही समय बताते हैं।

शरीर हो जाता है कड़ा

ऐसा आपने सुना होगा कि मरने के बाद शरीर काफी सख्त हो जाता है लेकिन क्या आपको उसका कारण पता है। इस प्रक्रिया को rigor mortis कहते हैं। लेकिन ये प्रक्रिया मौत के चार या पांच घंटे बाद शुरू होती है। 12 घंटे बाद ये अपने चरम पर होता है।

लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये होता क्यों है? दरअसल, हमारी मांस पेशियां अपने सूक्ष्म रंध्रों से शरीर में लगातार कैल्शियम का संचार करती रहती हैं। ये संरचना पंप जैसी होती है, मौत के बाद जब ये पंप बंद हो जाता है तो शरीर सख्त और कड़ा हो जाता है।

मानव अंग खुद को ही खाने लगते हैं

व्यक्ति की मौत के बाद उसके शरीर के अंग खुद को ही खाने लगते हैं या फिर यूं कहें कि खुद-ब-खुद ही गलने लगते हैं।

मानव शरीर में बनने वाले कई एंजाइम मौत के बाद अंगों को ही नष्ट करने लगते हैं। इसके अलावा शरीर में कुछ ऐसे बैक्टीरिया भी होते हैं जो जीवित रहते तो नुकसान नहीं पहुंचाते लेकिन शरीर के मरते ही नकारात्मक प्रभाव दिखाने लगते हैं।
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मोम या ऐसे ही किसी पदार्थ से ढक जाता है शरीर

आपको ये सुनकर आश्वर्य जरूर होगा कि व्यक्ति की मौत के बाद उसका शरीर बड़ी तेजी से बदलता है। जब कोई मृत शरीर ठंडी जमीन या पानी के संपर्क में आता है तो अपने चारों ओर एक आवरण बना लेती है।

ये कुछ-कुछ मोम सा होता है। ये आवरण बैक्टीरिया का बनाया हुआ होता है। ये आवरण प्राकृतिक संरक्षक की तरह काम करता है।
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