लंदन की लाल डबल डेकर बसें अपने बेहतरीन फीचर्स के लिए जानी जाती रही हैं। लेकिन अब इनमें एक क्रांतिकारी बदलाव हो रहा है और दूसरे शहर भी इन बदलावों से प्रभावित हो रहे हैं।
ब्रिटेन की राजधानी लंदन की सड़कों पर रोज़ाना लगभग 8700 डबल डेकर बसें दौड़ती हैं और इनमें तकरीबन 65 लाख लोग सफर करते हैं।
प्रदूषण घटाने के लिए इन डबल डेकर बसों को न केवल बैटरी से चलाया जाएगा, बल्कि ट्रांसपोर्ट फ़ॉर लंदन (टीएफ़एल) के प्रयोग अगर सफल रहे तो शहरी इलाक़ों के लिए यह बदलाव क्रांतिकारी हो सकते हैं।
नया सिस्टम
टीएफ़एल ऐसा रीचार्जिंग सिस्टम विकसित करने में जुटा है जो बसों पर लगा होगा और तब भी काम करता रहेगा, जब बसें सड़क पर दौड़ रही होंगी।
टीएफ़एल एक ऐसा सिस्टम तैयार कर रहा है जिससे बसों की बैटरी बिना तार के ही चार्ज हो जाएगी। इसका परीक्षण अगले साल की शुरुआत में करने की योजना है।
योजना यह है कि तारों के बड़े-बड़े बंडलों से पीछा छुड़ाते हुए शहर की बसों की बैटरी हर समय चार्ज्ड रहे, तब भी जब बसें चल रही हों।
टीएफ़एल बैटरी चार्जिंग के विकल्पों की तलाश कर रहा है। जब ज़रूरत हो तब बैटरी चार्ज। जैसा कि लोग स्मार्टफ़ोन के मामले में करते हैं। जैसे ही कोई ख़ाली सॉकेट देखते हैं, स्मार्टफ़ोन चार्ज करने लगते हैं।
बसों की बैटरी को भी इसी तरह जल्दी और आसानी से लबालब चार्ज किया जा सकता है। इससे बसों की डीज़ल पर निर्भरता नहीं रहेगी।