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हर नजर आपकी बाइक पर, इस तरह बदल जाएगा हुलिया

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आपने कार खरीदी, कुछ दिन बाद आपके पड़ोसी की पार्किंग में भी उसी मॉडल की कार दिखने लगी, तो फिर अपनी कार का मजा बेकार हो जाता है। लेकिन शौक बड़ी चीज है। जरा सी मेहनत, थोड़े से रुपये और क्रिएटिव सोच आपकी उसी कार को लाजवाब बना सकते हैं।
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जब आप उसके साथ सड़क से गुजरें, तो लोगों की नजरें ठहर जाएं! उसे आपके पास देखकर दोस्तों को भी जलन हो! वो आपके साथ हो, तो हर कोई आपसे बात करना चाहे, आपके साथ चलना चाहे! ये सब एक शानदार कार साथ होने से भी मुमकिन हो सकता है, बशर्ते आपको कार की दुनिया में छा रहे ट्रेंड के बारे में जानकारी हो।

ये ट्रेंड है कार कस्टमाइजेशन। युवा पीढ़ी न तो गाड़ी के लुक से समझौता करना चाहती है, न ही रफ्तार से। इसके लिए सबसे बड़ी उम्मीद बनकर सामने आया है कार कस्टमाइजेशन का ट्रेंड। कस्टमाइजेशन का मतलब है किसी चीज को मॉडिफाई करके उसका रूप बदल देना।
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कस्टमाइज करके सिर्फ व्हीकल का बाहरी लुक ही नहीं, इंटीरियर भी बदला जा सकता है। लुक के साथ-साथ कस्टमाइजेशन के जरिये रफ्तार भी बदली जा सकती है।

टार्जन-द वंडर कार

आपने ‘टार्जन-द वंडर कार’ देखी होगी। जानते हैं उस कार को किसने डिजाइन किया था? जवाब है मशहूर कार डिजाइनर दिलीप छाबडि़या ने। इस फील्ड में अपने दो दशकों के अनुभव और अनगिनत कार से लेकर बसों तक को कस्टमाइज करने के इंप्रेसिव पोर्टफोलियो के कारण वह इस फील्ड के गुरु बन गए हैं, लोग इन्हें 'इंडियाज डिजाइन गुरु' कहते हैं।

डी.सी डिजाइन देश की सबसे बड़ी कस्टमाइज कंपनी मानी जाती है। यह न सिर्फ व्हीकल का कस्टमाइजेशन करती है, बल्कि भारत की सबसे ज्यादा बिकने वाली कुछ कारों की बॉडी किट भी तैयार कर चुकी है।

कई बॉलीवुड सितारे न सिर्फ दिलीप की बनाई कारें इस्तेमाल करते हैं, बल्कि कई सितारों के लिए दिलीप ने वैनिटी वैन भी डिजाइन की है।

इंडियन कार के डिजाइन गुरु और डी.सी. डिजाइन के संस्थापक दिलीप छाबड़िया कहते हैं, ''भीड़ से अलग दिखने की चाह और व्हीकल को लग्जूरियस बनाने के लिए सेलिब्रिटीज से लेकर उद्योगपति और अमीर वर्ग कस्टमाइजेशन की ओर आकर्षित हुए हैं।'' अब आलम ये है कि कार से लेकर बाइक तक के सभी मॉडल अपग्रेड होने लगे हैं।

इरीडियम कोटेड स्पार्क प्लग, एयर फिल्टर, एक्जहॉस्ट, इग्निशन केबल, हाई फ्लो कारब्यूरेटर, एल्यूमीनियम रेडिएटर, फायर प्रूफ वायरिंग, टर्बोचार्जर और सुपर चार्जर से लेकर कोल्ड एयर फ्लो तक सभी के अपग्रेडेड पार्ट बाजार में मौजूद होने से ये काम और आसान भी हो गया है।

कैसे पाएं अप्रूवल

-सबसे पहले ऑरिजनल कार मेकर कंपनी से मॉडिफिकेशन अप्रूवल लें। उस अप्रूवल प्लान के आधार पर ही कार मॉडिफाई कराएं।

मॉडिफाई होने के बाद भी ऑरिजनल कार मेकर कंपनी से इसकी अप्रूवल लें।

-अगर यह अप्रूव हो जाता है, तो तीन गवर्नमेंट अप्रूव सर्टिफाई एजेंसी से इसकी अप्रूवल कराएं।

-सब कुछ क्लियर होने के बाद आरटीओ से सर्टिफिकेट लें। इसके बाद आप आराम से कार चला सकते हैं।

इन्हें बदलकर तो देखो

कार की लंबाई (व्हील बेस्ड), बेंच, सीट, लेजर लाइट, इलेक्ट्रिकली ऑपरेटेड सीट कम बेड, जीपीएस सिस्टम, एलसीडी टीवी, मिनी बार, डिश टीवी, सन रूफ

इसे बेकार न समझें

वाहन खरीदने के बाद अगर आप उसमें कुछ बदलाव करके उसे मॉडिफाई कराने की सोच रहे हैं, तो जान लें कि कुछ मॉडिफिकेशन सीएमवीआर 1989 (Central Motor Vehicle Rules 1989) के तहत गैरकानूनी और आपराधिक हैं। बिना आरटीओ के अप्रूवल के व्हीकल मॉडिफाई कराना आपके लिए मुसीबत बन सकता है।

हेडलाइट्स
किसी भी वाहन में दो से चार हेडलैंप लगाने की ही अनुमति है, जो ग्राउंड से 1.5 मीटर ऊंची होनी चाहिए। यह ध्यान रखना जरूरी है कि हेडलाइट 155 मीटर की दूरी कवर करे।

फॉग लैंप
वाहन में एक्स्ट्रा फॉग लैंप को सीएमवीआर के नियम 104 और 106 की अनुमति के आधार पर ही लगाया जा सकता है, इसे जमीन से 1.5 फिट की ऊंचाई से ज्यादा ऊपर फिट नहीं किया जा सकता। यह ज्यादा चकाचौंध वाला नहीं होना चाहिए।

फैंसी हॉर्न
हाइवे से गुजरती कार और टैक्सी में अक्सर आपने म्यूजिकल हॉर्न सुने होंगे। हालांकि सीएमवीआर के नियम 119 (2) के तहत मल्टी टोन हॉर्न की इजाजत नहीं है। केवल एमरजेंसी और पुलिस की गाड़ी में ही मल्टी टोन सायरन लगाने की इजाजत है।

बॉडी स्टाइल
एसयूवी के आकार में फेरबदल करके इसे मिनी ट्रक में तब्दील करना क्रिएटिविटी को दिखा सकता है, लेकिन ये मॉडिफिकेशन कानूनी तौर पर वैध नहीं है। आपकी गाड़ी की बॉडी का आकार आर.सी. (रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट) के मुताबिक ही होना चाहिए।

फैंसी नंबर प्लेट
मोटर व्हीकल एक्ट के अनुसार फैंसी नंबर प्लेट लगाना अपराध है। सीएमवीआर के सेक्शन-77 के अनुसार पर्सनल कार पर नंबर प्लेट सफेद रंग की ही होनी चाहिए। इसके अलावा इसके नंबरों का फॉन्ट साइज 6 सेमी हो।

बाइक भी नहीं है पीछे

जितनी कीमत में एक अच्छी कार खरीदी जा सकती है, उससे ज्यादा कीमत देकर युवा अपनी पसंदीदा बाइक खरीदने को बेचैन रहते हैं। जब बाइक खरीदने को लेकर इतना क्रेज है, तो उसके कस्टमाइजेशन के मौके को भी युवा हाथ से नहीं जाने देना चाहते।

होंडा, पल्सर, स्प्लैंडर और बुलेट जैसी बाइक्स को कस्टमाइज करवाकर अपने पसंदीदा व्हीकल में तब्दील किया जा रहा है। इस बढ़ते क्रेज को देखकर पिछले कुछ सालों में कई बाइक डिजाइनर भी इस फील्ड में आए हैं। जयपुर की राजपूत फैमिली में जन्मे विजय सिंह अजयराजपुरा का नाम इस फील्ड में काफी मशहूर है। गुलाबी नगरी जयपुर में उनकी राजपूताना कस्टम मोटरसाइकिल कंपनी अपने खास तरह के मोटर कस्टमाइजेशन के लिए पॉपुलर है।

बॉलीवुड के बाइक लवर अभिनेता जॉन अब्राहम विजय के पहले ग्राहक थे। इसके बाद शुरू हुआ बाइक को अपने रंग में रंगने का विजय का सफर अब तक जारी है।
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खर्च की कोई सीमा नहीं

टूटू धवन ऑटो एक्सपर्ट के मुताबिक ब्रांडेड ड्रेस और महंगे स्मार्टफोन के बाद युवाओं में सबसे ज्यादा होड़ आजकल मोटर व्हीकल्स को लेकर ही देखी जा रही है।

भीड़ से अलग दिखने के लिए अपने वाहन को अलग अंदाज में दिखाना युवाओं का प्रिय शगल बन गया है। इसमें कोई बुराई भी नहीं है, मगर कानूनी धाराओं का ध्यान रखना जरूरी है। बड़े-बड़े शहरों के ऑटोमोबाइल मार्केट में अब कार कस्टमाइज कराने का जरूरी सामान आसानी से खरीदा जा सकता है। न केवल कॉस्मेटिक मेकओवर का सामान बल्कि, मैकेनिकल मॉडिफिकेशन जैसे बॉडी, इंजन, अपग्रेडिंग ब्रेक्स आदि भी पसंद कर सकते हैं।

कार को कस्टम कराने में कितना खर्च आता है, यह आपकी डिमांड, फैशन और बजट पर निर्भर करता है। एक्सेसरीज शॉप में आपके पास गाड़ी को खूबसूरत दिखाने के ढेरों विकल्प हैं, जो आपका खर्च लाखों तक पहुंचा सकते हैं। अगर आप अपने वाहन को पूरी तरह स्टैंडर्ड लुक में तब्दील कर रहे हैं और नट, बोल्ट से लेकर एक-एक चीज बदलवा रहे हैं, तब खर्च की कोई सीमा नहीं रह जाती। कार कस्टमाइज करने वालों को भी इसका हुलिया बदलने में किसी तरह का ऐतराज नहीं होता। उनके लिए सिर्फ इतना जानना जरूरी होता है कि कार के मालिक आप हैं या नहीं। आपत्ति सिर्फ आर.टी.ओ को होती है। वह भी, जब आप वाहन का पूरा रंग और आकार ही बदलवा दें।
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