कारों के सुरक्षा मानकों की निगरानी करने वाली एक ब्रितानी संस्था के क्रैश टेस्ट में भारत की पाँच छोटी कार बनानी वाली कंपनियाँ विफल रहीं। क्रैश टेस्ट में यह देखा जाता है कि दुर्घटना होने की स्थिति में यात्रियों के कोई कार कितनी सुरक्षित है।
क्लिक करें ग्लोबल एनसीएपी नामक संस्था के टेस्ट से पता चलता है कि इन कारों से दुर्घटना होने की स्थिति में घातक या गंभीर चोटें लग सकती हैं।
मारुति सुजुकी अल्टो 800
उपभोक्ताओं के वाहन सुरक्षा से जुड़े पहलुओं पर कार्य करने वाली एक स्वतंत्र ब्रिटिश चैरिटी ग्लोबल एनसीएपी की रिपोर्ट के मुताबिक मारुति 800 क्रैश टेस्ट को पास नहीं कर पाई।
हालांकि, इन ऑटो कंपनियों का कहना है कि उनके प्रोडक्ट भारतीय सुरक्षा मानकों के अनुरूप हैं।
टाटा नैनो
उपभोक्ताओं के वाहन सुरक्षा से जुड़े पहलुओं पर कार्य करने वाली एक स्वतंत्र ब्रिटिश चैरिटी ग्लोबल एनसीएपी की रिपोर्ट के मुताबिक टाटा नैनो क्रैश टेस्ट को पास नहीं कर पाई।
इस बारे में टाटा मोटर्स के हेड (एडवांस्ड एवं प्रोडक्ट इंजीनियरिंग) टिम लेवरटॉन का कहना है कि टाटा नैनो सहित हमारे सभी वाहन भारतीय सुरक्षा नियमों को पूरा करते हैं।
फोर्ड फिगो
उपभोक्ताओं के वाहन सुरक्षा से जुड़े पहलुओं पर कार्य करने वाली एक स्वतंत्र ब्रिटिश चैरिटी ग्लोबल एनसीएपी की रिपोर्ट के मुताबिक फोर्ड फिगो क्रैश टेस्ट को पास नहीं कर पाई।
ग्लोबल एनसीएपी के चेयरमैन मैक्स मोस्ले का कहना है कि इन कारों की खराब संरचना और एयरबैग की गैर मौजूदगी भारतीय ग्राहकों के लिए जीवन का जोखिम है। भारत अब एक बड़ा वैश्विक बाजार है और छोटी कारों के लिए उत्पादन का केंद्र हैं।
इसलिए इन कारों में सुरक्षा का स्तर चिंतनीय है, जो यूरोप और उत्तरी अमेरिका में अब कॉमन फाइव स्टार स्टैंडर्ड से 20 साल पुराना है।
ह्यूंदे आई10
उपभोक्ताओं के वाहन सुरक्षा से जुड़े पहलुओं पर कार्य करने वाली एक
स्वतंत्र ब्रिटिश चैरिटी ग्लोबल एनसीएपी की रिपोर्ट के मुताबिक ह्यूंदे आईटेन क्रैश टेस्ट को पास नहीं कर पाई।
वहीं, ह्यूंदे मोटर इंडिया का कहना है कि उसके सभी वाहनों के डिजाइन एवं निर्माण भारतीय नियामकीय प्राधिकारों द्वारा तय सुरक्षा मानदंडों को पूरा करते हैं। फोर्ड इंडिया की प्रवक्ता ने कहा कि हमारे सभी वाहन इंडस्ट्री के सुरक्षा मानदंडों को पूरा करते हैं या उनके बेहतर हैं।
फॉक्सवैगन पोलो
उपभोक्ताओं के वाहन सुरक्षा से जुड़े पहलुओं पर कार्य करने वाली एक
स्वतंत्र ब्रिटिश चैरिटी ग्लोबल एनसीएपी की रिपोर्ट के मुताबिक फॉक्सवैगन पोलो उसके क्रैश टेस्ट
को पास नहीं कर पाई।
हालांकि, जांच में फॉक्सवैगन की पोलो अपने स्थिर ढांचे और एयरबैग फीचर के चलते अन्य कारों की तुलना में बेहतर पाई गई।
फॉक्सवैगन इंडिया के एमडी (यात्री कार) अरविंद सक्सेना का कहना है कि हमारे लिए यह खुशी की बात है कि पोलो को एडल्ट सुरक्षा मानदंडों के लिए फोर स्टार सेफ्टी रेटिंग मिली है। अब पोलो देश में प्रीमियम हैचबैक सेगमेंट में सबसे सुरक्षित कार है।