संगम की रेती पर अनूठे तरीके से प्रेम का पर्व वैलेंटाइन्स डे मनाया गया। यहां ‘वेलेंटाइन’ कोई और नहीं ‘मां गंगा’ रहीं। गंगा एक्शन परिवार की पहल पर गंगा तट पर जुटे हजारों गंगाभक्तों ने जल लेकर गंगा को वेलेंटाइन का दर्जा देते हुए उसकी अविरलता-निर्मलता का संकल्प लिया।
सभी ने प्रतिज्ञा ली कि जिस तरह अपने वेलेंटाइन के लिए लोग सभी कुछ न्योछावर करने को तैयार रहते हैं, उसी प्रकार वे आजीवन गंगा के लिए सभी प्रकार से समर्पित रहेंगे। संतों ने कहा कि आज का वेलेंटाइन एक दिन का हो सकता है लेकिन गंगा सिर्फ एक दिन नहीं जीवन भर की वेलेंटाइन है।
संतों ने एक फूल लेकर पूजा का संकल्प लिया। तकरीबन 45 देशों के गंगा भक्तों ने भारत में गंगा और अपने देश में गंगा जैसी ही किसी पवित्र नदी के संरक्षण और उसे निर्मल बनाने का संकल्प लिया। संतों ने कहा कि कुंभ के अंतिम शाही स्नान पर्व पर गंगा के लिए इससे बड़ा संकल्प दूसरा कोई नहीं। जीवन देने के लिए सेवाभाव की ‘किडनी’ नहीं गंगा संकल्प का ‘कलेजा’ चाहिए।
बसंत की पूर्व संध्या पर परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष और गंगा एक्शन परिवार के संयोजक स्वामी चिदानंद सरस्वती मुनि जी ने कहा कि बसंत का अर्थ बस अंत से लिया जाना चाहिए। संकल्प लें कि जाने-अनजाने भी गंगा को प्रदूषित करने की कोशिश का अंत होगा। गंगा ने हमें जितना दिया, हम उसका अंश भी दे सकें तो काफी सुधार होगा।
ब्राजील के प्रेम बाबा के मुताबिक कोरिया की हॉन नदी ऐसी निर्मल है कि बोट से जाते समय उसका जल निकाल कर पीया जा सकता है। इसी तरह अफ्रीका की नाइल नदी और बिट्रेन की टेम्स भी है, गंगा को भी ऐसा ही निर्मल बनाने के लिए संकल्प के साथ काम करने की जरूरत है। गंगा ने भारत को संस्कृति और सभ्यता का वरदान दिया है, ऐसे में इससे जुड़े सभी लोगों का दायित्व है वह गंगा को निर्मल रखें।
अलग अंदाज में मनाए गए ‘वेलेंटाइन डे’ पर अनेक गंगा साध्वियों ने देश की अन्य पवित्र नदियों का रूप धरकर लोगों को गंगा के प्रति जागरूक किया। शुरुआत में गोपूजा की गई। गंगा और वासंतिक गीतों पर स्वामी चिदानंद सहित अन्य गंगा भक्तों ने नृत्य किया। संकल्प में ब्राजील के प्रेम बाबा, पावनीजी, संत जग्गी वासुदेव, हालीवुड की गुरुमुख कौर, दक्षिण अमेरिका के अद्वैति स्वामी, साध्वी भगवती सरस्वती, मैक्सिको के गुरुसिंह सहित बड़ी संख्या में गंगाभक्त मौजूद थे।