संगम की रेती बृहस्पतिवार को एक नई परंपरा की साक्षी बनी। कल तक सिर पर ‘मैला ढोने’ और अछूत कही जाने वाली सौ से ज्यादा महिलाओं ने संतों, महामंडलेश्वरों, पुरोहितों के साथ बैठकर भोजन किया। सुलभ इंटरनेशनल से जुड़ीं मध्य प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, गुजरात आदि प्रदेशों से आई स्वच्छकार समाज की महिलाओं ने पवित्र संगम में डुबकी लगाने के बाद त्रिवेणी बांध स्थित बड़े हनुमान मंदिर में परंपरागत रूप से दर्शन-पूजन किया और महामंगल आरती में भी शामिल हुईं।
बड़े हनुमान मंदिर के व्यवस्थापक महंत आनंद गिरि की पहल पर गंगा सेना के कुंभ मेला स्थित शिविर में जुटी महिलाओं ने संतों, महामंडलेश्वरों से आशीर्वाद भी लिया। आनंद अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी गहनानंद, स्वामी बालकानंद, जगदीश्वरानंद, स्वामी राजेश्वरानंद, स्वामी राजेंद्र गिरि आदि ने कहा कि ईश्वर की दृष्टि में सभी समान हैं और संगम की रेती इसी सद्भाव, समानता, समरसता का संदेश देती है। सभी में उसी ईश्वर का अंश है, इसलिए किसी तरह का भेदभाव सभ्य समाज से ज्यादा उस सत्ता का अपमान है।
विषय प्रवर्तन करते हुए महंत आनंद गिरि ने कहा कि संगम की रेती पर समाज के अछूत कहे जाने वाले वर्ग के साथ भोजन करके संतों ने बराबरी का दर्जा और सम्मान दिया है। उन्होंने कहा कि मानवता की सेवा ही सच्ची ईश्वर सेवा है, यही कुंभ का संदेश भी है।
संयोजक और सुलभ इंटरनेशनल के अध्यक्ष डॉ. बिंदेश्वर पाठक ने कहा कि संतों ने साथ भोजन तथा भजन का अधिकार देकर उनका आत्मबल बढ़ाया है। यह पहल समाज को नई दिशा देगी। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में संत, पुरोहित मौजूद थे। बाद में उन्होंने अखाड़ों में भी जाकर संतों से मुलाकात की।