जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर जगद्गुरु पंचानन गिरि महाराज ने अपनी शिष्या राधे मां को हर परीक्षा में खरा बताया है। उनका कहना है कि राधे मां, संत और महामंडलेश्वर बनने की सारी अर्हताएं रखती हैं, बाकी महाकुंभ में आने को लेकर संतों की जो भी राय हो, वह सिर माथे पर।
गुरु ने कहा कि उनकी शिष्या पर लोगों ने सवाल उठाया तो जांच हुई। वह बेदाग बाहर निकलीं। प्रक्रिया में थोड़ी देर हो गई इस कारण वह फिलहाल कुंभ में नहीं आ पाईं। जब उन्होंने राधे मां को दीक्षा दी थी, उन्हें संत बनने की हर कसौटी में कसा था।
राधे मां के गुरु पंचानन गिरि इन दिनों महाकुंभ क्षेत्र में जूना अखाड़े में हैं। बताया कि राधे मां पांच साल पहले उनके संपर्क में आईं। उसी समय उनकी दीक्षा हुई। उन्हीं के आदेश पर राधे मां जूना अखाड़ा की महामंडलेश्वर बनने को तैयार हुईं।
कुंभ मेला में सेक्टर नौ स्थित शिविर में रह रहे जगद्गुरु ने बताया कि संत बनने से पहले उन्होंने पंजाब में आतंकवाद का मुकाबला किया। उन्होंने अखिल भारतीय हिंदू सुरक्षा समिति बनाई और अपने संगठन के माध्यम से आतंकवादियों का मुकाबला किया। आतंकियों से धमकी मिलने के बाद 1989 में उन्हें पंजाब सरकार ने कमांडो सुरक्षा उपलब्ध कराई जो आज तक जारी है। जगद्गुरु पंचानन गिरि कुंभ के व्यापारीकरण और राजनीतिकरण से निराश हैं।